

चाहे बीजेपी नेता सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि पार्टी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसके बावजूद बीजेपी और अकाली दल के बीच चुनावी गठबंधन की संभावना समाप्त नहीं हुई है. सूत्रों के मुताबिक, सीटों के बंटवारे को लेकर एक दौर की बातचीत हो चुकी है और अब तीन प्रमुख मुद्दों पर बात आगे बढ़ रही है.
सीटों पर क्या चल रहा है?
सूत्रों के मुताबिक यह तय है कि बीजेपी पहले की तरह गठबंधन में 25 से कम सीटों पर नहीं लड़ेगी. गौरतलब है कि बीजेपी ने अकाली दल के साथ गठबंधन में अभी तक जो विधानसभा चुनाव लड़े, उनमें बीजेपी जूनियर पार्टनर रही. बीजेपी इस गठबंधन में 117 में से केवल 23 सीटों पर ही लड़ती आई है. पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर बीजेपी इस बार अधिक सीटों का दावा कर रही है. 2024 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी को 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे. बीजेपी को 23 विधानसभा सीटों पर बढ़त थी. छह सीटों पर वह दूसरे और 16 सीटों पर तीसरे नंबर पर आई थी. इस तरह 45 विधानसभा सीटों पर वह अकाली दल से आगे रही.
वहीं अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे एक सीट पर जीत मिली थी. अकाली दल नौ विधानसभा सीटों पर पहले नंबर पर, पांच पर दूसरे और पांच पर ही तीसरे नंबर पर रहा था. इस तरह दोनों दलों के मिला कर करीब 32 प्रतिशत वोट मिले और 64 सीटों पर उपस्थिति दर्ज कराई. बीजेपी का आकलन है कि अगर दोनों दल साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़े होते तो यह गठबंधन 57 विधानसभा सीटों पर बढ़त ले सकता था, जो बहुमत के आंकड़े से केवल दो कम है. यानी दोनों दलों के साथ आने पर उन्हें फ्लोटिंग वोट भी मिल सकता है. इसी आधार पर कुछ अतिरिक्त वोट जुड़ने पर यह गठबंधन सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दे सकता है, जो बीजेपी नेताओं के अनुसार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है.
गौरतलब है कि दोनों दलों के बीच 1996 से 2020 तक गठबंधन रहा. 1997 में इस गठबंधन को प्रचंड विजय मिली थी. तब अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं. 2007 में भी इस गठबंधन को जीत मिली थी. तब अकाली दल ने 49 और बीजेपी ने 19 सीटें जीती थीं. 2012 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर इतिहास रचा था. तब अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में यह गठबंधन एक बार फिर कागज पर मजबूत दिखाई दे रहा है. सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों ने इसी जमीनी हकीकत को सामने रख साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर चर्चा हो रही है. दरअसल, दोनों दल अकेले लड़ कर देख चुके हैं कि वे चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पा रहे.
सीएम फेस किसका होगा?
जहां तक मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरने का मुद्दा है, इसे लेकर बीजेपी बहुत अधिक उत्साहित नहीं दिख रही. अकाली दल चाहेगी कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल गठबंधन के सीएम उम्मीदवार हों. लेकिन बीजेपी के कुछ नेताओं को लगता है कि इसमें उनकी छवि आड़े आ सकती है. हालांकि गठबंधन होने पर यह मान कर चला जाएगा कि चुनाव जीतने पर सीएम अकाली दल का ही होगा, क्योंकि वह अधिक सीटों पर लड़ेगी. बीजेपी ऐसे में उपमुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक सकती है.
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के ऐलान को लेकर अभी कोई जल्दबाजी नहीं है. बीजेपी के संगठन महासचिव बी एल संतोष की हाल की पंजाब यात्रा में बीजेपी के बूथ स्तर के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा हुई है. बीजेपी इसके लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाएगी. बीजेपी ड्रग्स के खिलाफ भी राज्य भर में यात्रा निकालेगी. ड्रग्स के खिलाफ केंद्र सरकार के मजबूत अभियान की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाया जाएगा.
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