धर्म

Sawan Somwar 2026: सावनभर शिवलिंग पर चढ़ाए बेलपत्र और फूल अब कहां रखें? आखिरी सोमवार पर न करें यह गलती


Sawan Somwar 2026: आज सावन का आखिरी सोमवार है. 28 अगस्त को सावन समाप्त हो जाएगा. सावन के पूरे महीने शिव भक्त बाबा महादेव पर बेलपत्र, धतूरा विशेष तौर पर अर्पित करते हैं, लेकिन चूंकि अब सावन का अंतिम पड़ाव चल रहा है ऐसे में कई भक्तों के मन में सवाल रहता है कि इतने दिनों से शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र और फूलों का क्या किया जाए? क्या है नियम आइए जानते हैं.

सावन के बाद चढ़े बेलपत्र और फूल कहां रखें?

  • पूजा समाप्त होने के बाद शिवलिंग पर चढ़े बेलपत्र और फूलों को कूड़ेदान, नाली या ऐसी जगह नहीं फेंकना चाहिए जहां लोग उन्हें पैरों से कुचलें.सामग्री को सामान्य कचरा न मानकर निर्माल्य कहा गया है, इसलिए इसके साथ श्रद्धापूर्वक व्यवहार करने की परंपरा है. 
  • इसे किसी पवित्र स्थान, बहते जल या मंदिर के पास बने निर्माल्य कुंड में ही विसर्जित करना चाहिए.
  • इन्हें किसी पेड़ पौधे की जड़ में, विशेषकर बेल के पेड़ के नीचे रखना उचित माना जाता है. घर के बगीचे में साफ स्थान पर भी इन्हें जमीन में गाड़ सकते हैं. प्राकृतिक तरीके से ये बेहतर तरीका है.

आखिरी सोमवार पर न करें ये गलती

सावन सोमवार की पूजा में चढ़ी हुई बेलपत्र को धोकर फिर से महादेव को अर्पित किया जा सकता है स्कंदपुराण से उद्धृत परंपरा में भी पहले अर्पित बिल्वपत्र को धोकर पुनः चढ़ाने का उल्लेख मिलता है, लेकिन चढ़े हुए फूलों को दोबारा भगवान को न अर्पित करें.

बेलपत्र चढ़ाते समय इन नियमों का रखें ध्यान

बेलपत्र साफ और बिना कटे-फटे होने चाहिए. सोमवार को बेलपत्र तोड़ने की बजाय इसे एक दिन पहले तोड़कर रख लेना चाहिए. बेलपत्र चढ़ाने से पापों का क्षय होता है और मानसिक शांति मिलती है, जबकि आयुर्वेद में बेल वृक्ष को औषधीय माना गया है.

सावन के आखिरी सोमवार पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र

शिवपुराण में बेलपत्र शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं, इस बारे में भी बताया गया है. बेलपत्र को उलटकर चिकनी वाली तरफ से शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. यह भी बताया गया है कि अगर आप अधिक बेलपत्र नहीं जुटा पाए हैं तो एक को भी जल से बार-बार धोकर शिवजी को चढ़ा सकते हैं.

न करें ये गलती

  • सावन सोमवार की पूजा में केवल सामग्री ही नहीं, बल्कि मन की शुद्धता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए व्रत या पूजा के दौरान क्रोध, कटु वाणी और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए.
  • अभिषेक के बाद निकले जल को धार्मिक भाव से देखा जाता है. उसे गंदे स्थान पर बहाने या उसके ऊपर पैर रखने से बचना चाहिए.
  • पूजा में स्वच्छ और उचित फूलों का इस्तेमाल करें. जमीन पर गिरे, सड़े या अत्यधिक मुरझाए फूल शिवलिंग पर अर्पित करने से बचें.

FAQ

  1. क्या सावन में चढ़ाए गए बेलपत्र को घर के गमले या बगीचे में रख सकते हैं?
    हां, पूजा के बाद बेलपत्र को किसी साफ गमले, बगीचे या पेड़-पौधे की जड़ में रखा जा सकता है. इससे पूजा सामग्री प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाती है. इसे कूड़ेदान या गंदे स्थान पर डालने से बचना चाहिए.
  2. क्या शिवलिंग पर चढ़े फूलों को नदी में प्रवाहित करना जरूरी है?
    नहीं, ऐसा करना जरूरी नहीं है. पूजा सामग्री को बहते जल में डालने की परंपरा कुछ स्थानों पर मिलती है, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से फूल-बेलपत्र को किसी स्वच्छ प्राकृतिक स्थान या मंदिर की निर्माल्य व्यवस्था में रखना बेहतर विकल्प है.
  3. क्या सावन के आखिरी सोमवार को भी नए बेलपत्र चढ़ाए जा सकते हैं?
    हां, आखिरी सोमवार को भी भगवान शिव को नए और साफ बेलपत्र अर्पित किए जा सकते हैं. बेलपत्र चढ़ाते समय उन्हें जल से साफ करके श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकते हैं.
  4. क्या शिवलिंग पर चढ़े बेलपत्र को घर में संभालकर रखना चाहिए?
    चढ़े हुए बेलपत्र को लंबे समय तक घर में जमा करके रखना आवश्यक नहीं है. पूजा के बाद इन्हें सम्मानपूर्वक किसी पौधे की जड़, साफ मिट्टी वाले स्थान या मंदिर की निर्धारित निर्माल्य व्यवस्था में रख सकते हैं.

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