
मुंबई में गणेशोत्सव सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि शहर की आत्मा और सबसे बड़ा जन-उत्सव है. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाले इस महापर्व में पूरी मायानगरी ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों, रोशनी और ढोल-ताशों की गूंज से सराबोर हो जाती है. साल 2026 में यह 10 दिवसीय भव्य उत्सव 14 सितंबर को गणेश स्थापना के साथ शुरू होकर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी यानी गणेश विसर्जन के साथ संपन्न होगा.

इस उत्सव की ऐतिहासिक जड़ें छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से जुड़ी हैं, जिसे 1893 में स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने एक विशाल सार्वजनिक मंच प्रदान किया. तिलक का मुख्य उद्देश्य सामाजिक भेदभाव को मिटाकर स्वतंत्रता संग्राम के लिए देशवासियों को एकजुट करना था. आज भी यह पर्व मुंबई की विविधता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का सबसे सशक्त उदाहरण पेश करता है, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं.

शहर के प्रमुख पंडालों की बात करें तो लालबाग स्थित ‘लालबागचा राजा’ सबसे प्रमुख केंद्र है, जिसे ‘मन्नतों का राजा’ भी कहा जाता है और जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालु 10 से 12 घंटे तक कतारों में खड़े रहते हैं. इसी क्षेत्र में स्थित ‘गणेश गल्ली’ (मुंबईचा राजा) अपनी शानदार थीम और प्रसिद्ध स्थलों की सजीव प्रतिकृतियों के लिए मशहूर है. वहीं दक्षिण मुंबई के गिरगांव का ‘खेतवाड़ी गणराज’ अपनी विशाल प्रतिमाओं और सोने-हीरों से सजे भव्य शृंगार के लिए देश भर में विख्यात है.

अन्य प्रमुख आकर्षणों में किंग्स सर्कल का ‘जीएसबी सेवा मंडल’ शहर का सबसे धनी गणेश मंडल माना जाता है, जहां इको-फ्रेंडली प्रतिमा को लगभग 60 किलो सोने और भारी चांदी के गहनों से अलंकृत किया जाता है. दूसरी ओर पश्चिमी उपनगर का ‘अंधेरीचा राजा’ अपनी खास सांस्कृतिक सजावट और मन्नतें पूरी करने की मान्यता के लिए जाना जाता है, जहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ बॉलीवुड सितारे भी बप्पा का आशीर्वाद लेने बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

त्योहार के दौरान मुंबई का पारंपरिक खानपान भी लोगों को खूब लुभाता है. भगवान गणेश के प्रिय ‘उकडीचे मोदक’ (चावल के आटे और नारियल-गुड़ से बने स्टीम्ड मोदक), पूरण पोळी, हल्दी के पत्तों में पकाई गई पाथोली और साबूदाना वड़ा पंडालों और घरों में प्रमुखता से बनाए जाते हैं. उत्सव का समापन समुद्र तटों पर भव्य विसर्जन के साथ होता है, जहां लाखों की भीड़ ढोल की थाप पर नाचते हुए बप्पा को अगले साल जल्दी आने की विदाई देती है.

यदि आप इस दौरान मुंबई भ्रमण की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा और ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लें. बड़े पंडालों में भारी भीड़ के कारण दर्शन में समय लग सकता है, इसलिए परिवार और बच्चों के साथ योजना बनाकर निकलें. विसर्जन के दिनों में गिरगांव चौपाटी, दादर और जुहू बीच की ओर भारी ट्रैफिक रहता है, इसलिए सड़क मार्ग के बजाय मुंबई लोकल ट्रेन या मेट्रो का उपयोग करना सबसे सुविधाजनक रहेगा.
Published at : 24 Aug 2026 11:39 AM (IST)


