
दतिया उपचुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद बीजेपी के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा गुरुवार (6 अगस्त) को दिल्ली पहुंचे. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी नेता से मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा है और अभी मिलने का भी कोई विचार नहीं है. उन्होंने कहा कि वो अपने दोस्त आसाराम अहिरवार जो दतिया जिले से विधायक रहे हैं, उनसे मुलाकात हुई और उनके स्वास्थ्य का हाल चाल जाना.
बता दें कि दतिया उपचुनाव में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था और पार्टी हार गई. इस सीट से नरोत्तम मिश्रा तीन बार विधायक रह चुके हैं. 2023 का विधानसभा चुनाव वो हार गए थे.
नरोत्तम मिश्रा के दिल्ली दौरे पर हलचल क्यों?
ऐसे में उपचुनाव नतीजों के बाद नरोत्तम मिश्रा के दिल्ली दौरे ने सियासी हवा गरम कर दी. कहा गया कि पार्टी के बड़े नेताओं से उनकी मुलाकात हो सकती है और आगे के सियासी भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है. हालांकि, ऐसे दावों को नरोत्तम मिश्रा ने खारिज कर दिया.
क्या संगठन में किसी बदलाव की आहट है, इस पर उन्होंने कहा, “मेरी जानकारी में इस तरह की कोई बात नहीं है.” सीएम मोहन यादव की संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात पर उन्होंने कहा, “बिल्कुल मिले होंगे, मेरी जानकारी में नहीं है.”
क्या आपकी किसी बड़े नेता से मुलाकात होने वाली है, इस पर उन्होंने कहा, “मांगा ही नहीं है (समय) तो मिलेगा कहां से.” बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की संभावना पर उन्होंने कहा, “न मुलाकात की है और न समय मांगा है.”
कल भोपाल जाने की योजना है- नरोत्तम मिश्रा
जब उनसे सवाल किया गया कि कल (7 अगस्त) की आपकी क्या योजना है तो इस पर उन्होंने कहा, “कल भोपाल जाने की योजना है. जैसे ही टिकट मिल जाएगा, चला जाऊंगा.”
अगर टिकट नरोत्तम मिश्रा को मिलता तो दतिया में बीजेपी की जीत होती, ऐसी चर्चा पर उन्होंने कहा, “अगर और मगर का कोई जवाब नहीं होता और संभावनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जाती. पार्टी ने जो सोचा है सही सोचा है. मैं ऐसा मानता हूं.”
‘आगे भी कार्यकर्ता के रूप में रहना चाहता हूं’
आगे का पड़ाव क्या है, इस पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “एक कार्यकर्ता के रूप में पिछले ढाई साल से हूं, आगे भी कार्यकर्ता के रूप में रहना चाहता हूं. पार्टी काम देती रही. महाराष्ट्र चुनाव में महाराष्ट्र भेज दिया था, दिल्ली चुनाव में दिल्ली भेजा था, बिहार चुनाव में बिहार भेजा था, ऐसे प्रदेशों में चुनाव में काम पर भेजते रहे. बाकी किसी पद की इच्छा नहीं है.”
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