

लता मंगेशकर और सचिन देव बर्मन (एस.डी. बर्मन) की जोड़ी हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास की सबसे यादगार जोड़ियों में गिनी जाती है. दोनों ने मिलकर कई ऐसे गीत दिए, जो आज भी सदाबहार माने जाते हैं. एस.डी. बर्मन के निर्देशन में लता मंगेशकर ने पहली बार 1950 में आई फिल्म ‘मशाल’ के लिए अपनी आवाज दी थी. इस फिल्म के गाने दर्शकों को बेहद पसंद आए और इसकी सफलता ने एस.डी. बर्मन को मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में मजबूत पहचान दिलाई. इसके बाद 1951 से दोनों ने लगातार कई फिल्मों में साथ काम किया. इस दौर में रिकॉर्ड हुए उनके गीत न सिर्फ सुपरहिट साबित हुए, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर बन गए.
‘मिस इंडिया’ के बाद बढ़ी दूरियां
‘ठंडी हवाएं लहरा के आएं’, ‘जाए तो जाए कहां’, ‘आने वाले रुक जा’ और ‘निगाहें बिछा के बैठे हैं’ जैसे कई यादगार गीत देने के बाद 1957 में दोनों ने फिल्म ‘मिस इंडिया’ के लिए भी साथ काम किया. हालांकि, इसी समय उनके रिश्तों में तनाव की शुरुआत हो चुकी थी और दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे.
विदेश यात्रा बनी विवाद की वजह
लता मंगेशकर ने अपने बायोग्राफर हरीश भिमानी और पत्रकार नसरीन मुन्नी कबीर को दिए इंटरव्यू में इस विवाद का जिक्र किया था. दरअसल, 1957 के दौरान उन्हें किसी जरूरी काम से विदेश जाना था. उसी समय फिल्म ‘सितारों से आगे’ का गीत ‘पग ठुमक चलत बलखाए’, जिसे वैजयंतीमाला पर फिल्माया जाना था, अभी रिकॉर्ड होना बाकी था. संगीतकार जयदेव के मुताबिक, लता जी ने पहले कहा था कि वह विदेश रवाना होने से पहले गीत रिकॉर्ड कर देंगी, लेकिन बाद में तय तारीख पर यह संभव नहीं हो पाया और रिकॉर्डिंग टल गई.
ऐसे खत्म हुई नाराजगी
इसके बाद एस.डी. बर्मन ने अपने सहायक जयदेव के जरिए यह जानने की कोशिश की कि क्या लता मंगेशकर लौटते ही इस गीत की रिकॉर्डिंग करेंगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इससे एस.डी. बर्मन नाराज हो गए और दोनों ने कई वर्षों तक साथ काम नहीं किया. आखिरकार 1963 में फिल्म ‘बंदिनी’ के दौरान उनके बीच सुलह हुई. इसी फिल्म के लिए लता मंगेशकर ने ‘मोरा गोरा अंग लइ ले’ गाया, जो रिलीज होते ही बड़ी सफलता बन गया. आज भी यह गीत हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत और कालजयी गीतों में शुमार किया जाता है.





