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खदानों से निकलेगा सोने का खजाना, विदेशों से नहीं पड़ेगा मंगाना, जानें क्या है मोदी सरकार का 21 साल वाला मास्टरप्लान | WGC Swarnim Udaan: 21-Year Masterplan to Transform India’s Gold Market



भारत के गोल्ड मार्केट की तस्वीर बदलने के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) अगले 21 साल का एक बहुत बड़ा महत्वाकांक्षी महाप्लान लेकर आया है. इस मास्टर प्लान को नाम दिया गया है- ‘स्वर्णिम उड़ान’. यह सीधे तौर पर भारत सरकार के विकसित भारत 2047 के सपने को सच करने की दिशा में बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस ‘स्वर्णिम उड़ान’ से हमारी और देश की अर्थव्यवस्था की चमक कैसे बढ़ने वाली है. 

स्वर्णिम उड़ान के 5 बड़े लक्ष्य

देश की खदानों से निकलेगा अपना सोना: अभी हम अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से खरीदते हैं. लेकिन इस योजना के तहत लक्ष्य है कि देश की कुल जरूरत का 10 से 20 प्रतिशत सोना खुद भारत की ही खदानों से निकाला जाए.

दुनिया के ज्वेलरी लीडर बनने की तैयारी: हमारी सोने के गहनों की इंडस्ट्री को दुनिया का नंबर वन मैन्युफैक्चरर बनाने की तैयारी है. ठीक वैसे ही, जैसे आज भारत की डायमंड इंडस्ट्री का पूरी दुनिया में डंका बजता है.

सिर्फ गहने नहीं, अब हाई-टेक पहचान: सोना अब सिर्फ गले का हार या हाथों की चूड़ी तक सीमित नहीं रहेगा. इस चमकीली धातु का इस्तेमाल अब सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस (अंतरिक्ष तकनीक), हेल्थकेयर और आधुनिक गैजेट्स में बड़े पैमाने पर किया जाएगा.

लॉकर का सोना देश के काम आएगा: हमारे घरों में जो सोना सालों से बंद पड़ा है, उसे वित्तीय योजनाओं (Financialisation) के जरिए देश की तरक्की के मुख्य रास्ते पर लाया जाएगा, ताकि वह देश की प्रोडक्टिविटी बढ़ा सके.

युवाओं को जोड़ने की कोशिश: आने वाले सालों में देश के सबसे बड़े खरीदार यानी Gen Z युवाओं को गोल्ड ज्वेलरी की तरफ आकर्षित करने के लिए नए और आधुनिक डिजाइन पेश किए जाएंगे. 

भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन का मानना है कि इस योजना का असल मकसद यह देखना है कि सोना भारत को एक ग्लोबल सुपरपावर बनाने में कैसे अपना बड़ा योगदान दे सकता है. 

सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?

आज भारत को भारी मात्रा में सोना आयात (Import) करना पड़ता है. इससे हमारे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बाहर जाता है और हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के शिकार होते हैं. जब हमारा घरेलू गोल्ड इकोसिस्टम मजबूत होगा, तो विदेशों पर हमारी निर्भरता बहुत कम हो जाएगी. यह सीधा-सीधा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के संकल्प को जमीन पर उतारने जैसा है.

भारत में सोने की कितनी खपत?

भारत सरकार के खनिज मंत्रालय की रिपोर्ट्स और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल  के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. केवल एक तिमाही (जैसे Q1 2026) में ही भारत की कुल सोने की मांग 151 टन रही, जिसकी कीमत लगभग 2.27 लाख करोड़ रुपये थी. भारत में अब लोग सिर्फ सोने के गहने (Jewellery) ही नहीं खरीद रहे, बल्कि सोने के सिक्के, बार (Bars) और डिजिटल गोल्ड (Gold ETF) में भी जमकर निवेश कर रहे हैं.

आपको जानकर हैरानी होगी कि इतनी भारी खपत के मुकाबले भारत में सोने का उत्पादन न के बराबर है. भारत सरकार के खनिज मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर साल औसतन सिर्फ 1.2 टन से 1.6 टन (लगभग 1,200 से 1,600 किलोग्राम) प्राइमरी सोने का उत्पादन होता है.

देश का 93% से अधिक सोना अकेले कर्नाटक की खदानों (जैसे हुत्ती गोल्ड माइन्स- HGML) से निकाला जाता है. इसके अलावा कुछ मात्रा में झारखंड और आंध्र प्रदेश से भी इसका उत्पादन होता है. हिंडाल्को (Hindalco) जैसी कंपनियां तांबे (Copper) को रिफाइन करने के दौरान उप-उत्पाद (By-product) के रूप में भी थोड़ा सोना निकालती हैं.

गोल्ड के इम्पोर्ट से भारत पर बढ़ता है बोझ

हमारी मांग (700-800 टन) के सामने हमारा घरेलू उत्पादन (लगभग 1.5 टन) न के बराबर है. इसलिए हमें अपनी 99% से अधिक मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से सोना इम्पोर्ट करना पड़ता है. भारत हर साल लगभग 700 से 750 टन सोना बाहर से मंगवाता है. क्रूड ऑयल के बाद सोना भारत का दूसरा सबसे बड़ा आयात आइटम है. इस पर हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च करते हैं. भारत मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और दक्षिण अफ्रीका से सोना इम्पोर्ट करता है.





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