
गाजियाबाद:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रोटेस्ट ना सिर्फ नेशनल, बल्कि इंटरनेशनल लेवल तक सुर्खियों का हिस्सा बना और ऐसी ही सुर्खियां बटोरीं इस आंदोलन के दौरान प्रोटेस्टर छात्रों को खाना खिला रहे गाजियाबाद के लॉ ग्रेजुएट मुहम्मद जुनैद ने. एक तरफ जहां लोग उन्हें उनके इस नेक काम के लिए सराह रहे थे, तो वहीं आंदोलन के आलोचकों ने ये सवाल भी उठाया कि आखिर जुनैद के पास इस लंगर के लिए पैसा कहां से आ रहे थे. एनडीटीवी डिजिटल ने जुनैद से मुलाकात की तो ये सवाल सीधा उनसे ही पूछ लिया और जो जवाब मिला वो नीचे आपके सामने है.
जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के शुरुआती दौर से ही जुनैद ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई और आखिरी दिनों तक वहां डटे रहे. जुनैद बताते हैं, “पहली रात को करीब चार से पांच सौ लोग रुके थे. मैंने देखा कि कई छात्रों के पास ठहरने का इंतजाम नहीं है. लोगों के पास किराया देने के लिए भी पैसे नहीं थे और जंतर-मंतर पर सो रहे थे. अगले दिन हमने उनके लिए चाय और नाश्ते का प्रबंध किया.
“जब प्रोटेस्ट चौबीसों घंटे वाले मोड में आ गया तो लोग अपनी श्रद्धा से हमारे साथ जुड़ने लगे और मदद के लिए हाथ बढ़ाने लगे. कुछ एनजीओ सौ-पचास प्लेट खाना लेकर आ रहे थे. किसान संगठनों के लोग आने लगे. कई-कई अकेले आने वाले लोग भी खाने-पीने चीजें लाने लगे. प्रोटेस्ट का दायरा बढ़ने के साथ ही लोगों की मदद भी बढ़ने लगी और लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फूड भेजने लगे.”
मोहम्मद जुनैद
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में खाना बांटने वाले
‘कोई 200 प्लेट खाना भेज रहा था, तो कोई पानी…’
जुनैद बताते हैं, “हमारी करीब पच्चीस लोगों की टीम बन गई थी. हमारा काम मौके पर चीजों को व्यवस्थित करना था. हमें एक किसान संगठन ने कॉल करके बोला कि हम 200 लोगों का भोजन भेज रहे हैं. किसी दूसरे एनजीओ ने कहा कि हम योगदान करना चाहते हैं और खाना भेजना चाहते हैं. इसके बाद हम इस तरह से मैनेज करने की कोशिश करते थे कि खाना खराब ना हो. हम कुछ लोगों को बोलते थे कि आप सुबह भेज दें और कुछ से बोल दिया जाता था कि आप शाम का खाना भेज देना.”
जुनैद आगे बताते हैं, “लोग खुद ही मदद के लिए आगे आने लगे. कोई पानी लेकर आ रहा था और कोई बिस्किट-नमकीन लेकर आ रहा था. प्रोटेस्ट में अकेले आने वाले कई लोग भी अपने बैग में खाने की चीजें लेकर आया करते थे. एक आंटी सुबह-सुबह चाय बनाकर लाती थीं.”
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सीजेपी और इसके प्रोटेस्ट पर एक नजर
16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की शुरुआत की. कुछ ही दिनों में, इसके Instagram और X हैंडल पर बहुत बड़ी तादाद में फॉलोअर्स जुड़ गए. 6 जून को जंतर-मंतर पर सीजेपी का पहला प्रोटेस्ट हुआ, जब अभिजीत दीपके अमेरिका से आकर आंदोलन में शामिल हुए थे. इसके बाद, 7-19 जून तक CJP ने जागरूकता बढ़ाने और जवाबदेही की मांग को दोहराने के लिए डिजिटल कैंपेन चलाई. 20 जून को दूसरी बार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रोटेस्ट की शुरुआत हुई.
20 जुलाई को सीजेपी ने ‘संसद मार्च’ का ऐलान किया था और करीब 50,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी इसमें शामिल हुए. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया. छात्रों के खिलाफ हुए पुलिस एक्शन के बाद प्रोटेस्ट का दायरा बढ़ता गया और देश कई अन्य शहरों में भी इसका असर देखने को मिला.
21 से 25 जुलाई तक क्या-क्या हुआ?
20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज होने के बाद प्रोटेस्टर्स लगभग चौबीसों घंटे जंतर-मंतर और उसके आस-पास की सड़कों पर डटे रहे. देश भर से लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर एकजुटता और समर्थन दिखा रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कई शहरों में ऐसे ही प्रदर्शन हुए. विपक्ष के नेता शरद पवार, डिंपल यादव, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अन्य नेताओं ने जंतर-मंतर का दौरा किया. अलग-अलग क्षेत्रों की कई जानी-मानी हस्तियों ने सीजेपी के आंदोलन को अपना समर्थन दिया. और आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.





