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पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक को श्रद्धांजलि देने बागपत जाएंगे राहुल गांधी, यूपी चुनाव के पहले जाटलैंड में गरमाएगी सियासत | Rahul Gandhi to visit Baghpat on former Governor Satya Pal Malik first death anniversary Jatland politics before UP election



बागपत:

कांग्रेस नेता राहुल गांधी 5 अगस्त को बागपत दौरे पर जाएंगे. पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की पहली पुण्यतिथि के कार्यक्रम में राहुल गांधी शामिल होंगे. राहुल गांधी श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने आएंगे.राहुल हिसावदा गांव में श्रद्धांजलि सभा में पहुंचेंगे.कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तैयारियां तेज कर दी हैं. सत्यपाल मलिक ने राज्यपाल रहते किसान आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उनके बीजेपी के साथ राजनीतिक मतभेद उभरे. फिर पुलवामा हमले में भी खुफिया तंत्र की विफलता के आरोप लगाए.

सत्यपाल मलिक के परिवार ने की पुष्टि

दिवंगत सत्यपाल मलिक के भतीजे मनीष मलिक ने भी इसकी पुष्टि की है. मनीष अपने दादा आजाद मलिक खाप चौधरी और सुभाष खोकर चौबीसी चौधरी के साथ कांग्रेस ऑफिस गए थे. वहां उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से भेंट की थी. इसके बाद राहुल गांधी को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया गया. मनीष मलिक का कहना है कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ओर से श्रद्धांजलि सभा में आने के लिए सहमति दी गई है. कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर बैठकें भी शुरू कर दी हैं. 

हिसावदा गांव में जन्में मलिक

बागपत जिले के हिसावदा गांव में जन्मे सत्यपाल मलिक ने मेरठ विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई के साथ छात्र राजनीति में कदम रखा. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से प्रभावित होकर राजनीति में कदम रखा. 1974 में बागपत से विधायक चुने जाने के बाद वो 1980 से 1989 तक राज्यसभा सांसद रहे. मलिक 1989 में अलीगढ़ से जनता दल सांसद बने. वीपी सिंह की सरकार केंद्रीय मंत्री रहने के बाद 2012 में वो भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने.वो बिहार, ओडिशा, गोवा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय जैसे कई राज्यों के राज्यपाल रहे. 

जाटलैंड कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा

उत्तर प्रदेश का जाटलैंड यानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन अब यह बीजेपी का मजबूत किला बन चुका है. हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा यहां सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर जैसी कई सीटें हार गई थी. यहां बीजेपी और सपा के बीच कांटे की टक्कर देखी जाती रही है. किसान आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने इस इलाके में खूब मेहनत की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसे ज्यादा फायदा नहीं मिला. 2022 विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ लड़ने वाली जाट पार्टी रालोद भी अब भाजपा के साथ जा चुकी है. जाट-मुस्लिम गठजोड़ के सहारे सपा ने यहां विधानसभा चुनाव में काफी असर दिखाया. लेकिन रिवर्स ध्रुवीकरण की राजनीति से उसे झटका लगा है. दिल्ली एनसीआर में भी जाटलैंड का काफी इलाका आता है. ऐसे में केंद्रीय राजनीति के मुद्दों की छाया भी जाटलैंड पर पड़ती रही है.

वेस्ट यूपी में जाटों का प्रभाव

जाटलैंड मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और आगरा मंडलों में फैला है. बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद और हापुड़ जाट बेल्ट के सबसे बड़े जिले हैं. जबकि अलीगढ़, मथुरा,हाथरस,बिजनौर, अमरोहा, गौतम बुद्ध नगर, सहारनपुर और मुरादाबाद तक जाट राजनीति का असर देखा जाता है. 

जाटलैंड में किसानों से जुड़े मुद्दों का असर

गन्ना किसानों का बकाया भुगतान और गन्ना समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी यहां बड़ा मुद्दा रही है. राकेश टिकैत, नरेश टिकैत समेत भारतीय किसान यूनियन के कई बड़े नेताओं ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में दमखम दिखाया था. किसान फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा भी उठाते रहे हैं. खेती के लिए ट्यूबवेल की बिजली दरें, बिजली आपूर्ति और खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर भी यहां माहौल गरमाता रहा है. विपक्षी दलों ने अग्निवीर को भी बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की थी.  

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10 सालों से बीजेपी का दबदबा

मोदी लहर के बाद यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में भी बीजेपी ने करिश्मा दिखाया और पहली बार अपने बलबूते बहुमत हासिल कर यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाई थी. हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग का असर से यहां पूरा पासा पलट गया. पश्चिमी यूपी की 80% से ज्यादा सीटों पर भाजपा जीती. रालोद, सपा और बसपा को भारी नुकसान हुआ था. किसान आंदोलन के बाद भाजपा के सामने यहां बड़ी चुनौती थी. सपा-रालोद गठबंधन से मुकाबला था. हालांकि दोनों मिलकर भी भाजपा को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए. योगी आदित्यनाथ पर जाटलैंड ने भरोसा दिखाया.

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