

संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया को संदेश दिया. अंग्रेजी में दिए अपने भाषण में उन्होंने दुनिया भर में चल रहे युद्धों पर चिंता जताई. जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध चिंता का विषय है. मिडिल ईस्ट में संकट के हालात हैं. जयशंकर ने कहा कि इन युद्धों का असर दूसरे देशों पर पड़ रहा है. पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.
यूक्रेन, खाड़ी और फिलिस्तीन पर साफ बात
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष और टकराव हमारी मुख्य चिंता बने हुए हैं. शांति बनाए रखने में विफलता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति को खतरे में डाल रही है और विकास को धीमा कर रही है. युद्ध के प्रभाव दुनिया भर में महसूस किए जाते हैं. संघर्षों से दूर देशों को बिना किसी गलती के नुकसान उठाना पड़ रहा है. जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है. इस असेंबली को हालात की सच्चाई का सामना करना होगा. इस साल, हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं.
दुनिया भर के देशों की चिंता भारत ने की
जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में योगदान दे रहा है. आइए हम यह समझें कि शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का न होना नहीं है. अगर दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है, तो हम वास्तव में एक खाई के किनारे जी रहे हैं. हमें खाई में धकेलने के लिए बस एक और कदम की जरूरत है. इसलिए, सब कुछ अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की मानसिकता ने संस्थानों को कमजोर किया है और बाधाएं पैदा की हैं. यह वित्त की दुनिया से लेकर बाजार तक पहुंच को सीमित करने, सप्लाई चेन को बाधित करने और तकनीक को रोकने तक फैला हुआ है. संसाधन और कनेक्टिविटी विशेष रूप से लाभ उठाने का जरिया बन गए हैं. नतीजतन, देश अब लाभ उठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हमला बर्दाश्त नहीं
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, “संघर्षों से दूर रहने वाले देशों को बिना किसी गलती के सज़ा भुगतनी पड़ रही है. जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है. इस सभा को हालात की असलियत का सामना करना होगा. इस साल, हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जो पहले से ही मुश्किल हालात को और बिगाड़ रहा है. हम लगातार जारी तनाव को लेकर बहुत चिंतित हैं. अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है. भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की अपील करता है. खाद की कमी और अब अनाज की आवाजाही में रुकावटें, ये सभी चिंता की बातें हैं. इसके अलावा, SDG (सतत विकास लक्ष्य) की प्रगति पर भी दबाव बढ़ रहा है. ग्लोबल साउथ के अधिकारों को भी गैर-बाज़ार प्रथाओं और बाज़ार तक पहुंच से रोककर कमज़ोर किया जा रहा है. तकनीक की जो प्रगति उम्मीद जगाने के लिए थी, वह अब चिंता का कारण बन गई है. भारत शांति लाने के लिए चल रही पहलों का समर्थन करता है.”
आतंकवाद पर दुनिया को साथ आने को कहा
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देना और फिर उसके नतीजों से छूट की उम्मीद करना, यह नहीं चलेगा. आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा. दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती और ऐसे समझौतों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे. यह आतंकवाद फैलाने वाले की ज़िम्मेदारी है कि वह अपना रवैया सुधारे.
भारत के ग्रोथ की कहानी दुनिया को सुनाई
जयशंकर ने कहा कि दुनिया के मौजूदा हालात को देखते हुए, UN के हर सदस्य को खुद से यह पूछना चाहिए कि वे क्या कर सकते हैं? जहां तक भारत की बात है, इसके समावेशी विकास और सर्वांगीण प्रगति ने दुनिया की एक-छठी आबादी के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीदें जगाई हैं. जब स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचती है. जब पीने का पानी, बिजली, सड़कें और आवास सुनिश्चित किए जाते हैं तो असल में इससे वैश्विक SDG नतीजों में सुधार होता है.
लेकिन आज, भारत के पास देने के लिए इससे कहीं ज्यादा है. हमारा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक लाभ पहुंचाने की रीढ़ भी है. इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास इसके सभी पहलुओं में साफ दिखता है. लगातार बेहतर होता ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार में आसानी), ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (जीवन जीने में आसानी), और स्टार्ट-अप व इनोवेशन का कल्चर, 78 देशों में चल रहे 600 बड़े भारतीय विकास प्रोजेक्ट हमारी प्रतिबद्धता का सबूत हैं. यह प्रतिबद्धता इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खेती से लेकर IT और क्षमता निर्माण तक फैली हुई है.
भारत मदद करने में सबसे आगे
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि क्लाइमेट एक्शन प्रोजेक्ट और पहल इन प्रयासों का अहम हिस्सा रहे हैं. चाहे वह साफ ऊर्जा और साफ पानी के प्रोजेक्ट हों, टिकाऊ खेती हो या बेहतरीन तौर-तरीकों को अपनाना हो. हमारी क्षमताएं और अनुभव विदेशों में भी दिखे हैं. इस सफर में अफ़्रीकी देश और छोटे द्वीप वाले विकासशील देश हमारे पसंदीदा साझेदार रहे हैं. इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिज़ास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गठबंधन, या ग्लोबल बायोफ़्यूल अलायंस जैसी पहल लगातार आगे बढ़ रही हैं. हमारे समय की उथल-पुथल यह भी मांग करती है कि हममें से हर कोई और ज्यादा योगदान दे. भारत ने संघर्ष वाले इलाकों, महामारी प्रभावित जगहों और प्राकृतिक आपदाओं के बाद मेडिकल सप्लाई भेजी है. ‘फ़र्स्ट रिस्पॉन्डर’ (सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले) के तौर पर हम सबसे पहले पहुंचे. चाहे नेपाल में अचानक आई बाढ़ हो या वेनेज़ुएला में आया भूकंप. हमारे ‘लिंब फ़िटमेंट कैंप’ (कृत्रिम अंग लगाने वाले कैंप) ने दुनिया भर में कई लोगों को नई उम्मीद दी है. चाहे भोजन और दवा की कमी को पूरा करना हो, ऊर्जा या खाद की जरूरतें हों.
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