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UP Police Constable Medical: फ्लैट फुट, नॉक नी और कलर ब्लाइंडनेस…मेडिकल में रिजेक्ट कर सकती हैं ये चीजें | up police constable medical flat foot knock knee colour blindness medical test



UP Police Constable Medical: यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल बनने का सपना देख रहे हैं, तो सिर्फ एग्जाम और फिजिकल पास करना ही काफी नहीं है. मेडिकल टेस्ट भी उतना ही जरूरी होता है. कई बार लोग बाकी सभी स्टेज आसानी से पार कर लेते हैं, लेकिन फ्लैट फुट, नॉक नी या कलर ब्लाइंडनेस जैसी कुछ दिक्कतों की वजह से मेडिकल में रिजेक्ट हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप भी इस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले से जान लें कि मेडिकल टेस्ट में किन चीजों की जांच होती है, कौन सी दिक्कतें परेशानी बन सकती हैं और मेडिकल के दौरान किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.

मेडिकल टेस्ट में क्या-क्या चेक होता है

मेडिकल टेस्ट में डॉक्टर ये देखते हैं कि आप पुलिस की नौकरी के लिए पूरी तरह फिट हैं या नहीं. इसमें आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता, लंबाई, सीना, हाथ-पैर, शरीर की बनावट और दूसरी जरूरी हेल्थ चेकअप किए जाते हैं. अगर किसी तरह की बड़ी दिक्कत मिलती है, तो मेडिकल बोर्ड अपने नियमों के हिसाब से फैसला लेता है.

फ्लैट फुट और नॉक नी क्यों बन सकते हैं परेशानी

फ्लैट फुट का मतलब है कि पैरों के तलवों में सामान्य घुमाव नहीं होता. ऐसे में लंबे समय तक दौड़ने या खड़े रहने में परेशानी हो सकती है. वहीं नॉक नी में दोनों घुटने एक-दूसरे से टकराते हैं, जिससे दौड़ने और चलने में दिक्कत आ सकती है. अगर जांच के दौरान ये परेशानी तय सीमा से ज्यादा मिलती है, तो मेडिकल में रिजेक्ट किया जा सकता है.

कलर ब्लाइंडनेस की भी होती है जांच

पुलिस की नौकरी में कई बार रंगों की सही पहचान करना जरूरी होता है. इसलिए मेडिकल टेस्ट के दौरान कलर विजन भी चेक किया जाता है. अगर कोई व्यक्ति लाल, हरे या दूसरे जरूरी रंगों की सही पहचान नहीं कर पाता और तय नियमों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे मेडिकल में रिजेक्ट किया जा सकता है.

मेडिकल से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आपको पहले से किसी तरह की हेल्थ से जुड़ी दिक्कत है, तो मेडिकल टेस्ट से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. जांच के समय सभी जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखें और सही जानकारी दें. किसी भी बीमारी या परेशानी को छिपाने की कोशिश न करें. याद रखें कि मेडिकल में पास या रिजेक्ट करने का अंतिम फैसला मेडिकल बोर्ड और यूपी पुलिस (UP Police) के आधिकारिक नियमों के आधार पर ही लिया जाता है.

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