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’58 लोगों की जान गई थी’, कोयंबटूर ब्लास्ट के 5 दोषियों को 60 दिन की पैरोल, विजय सरकार पर BJP का हमला | coimbatore Blast Convicts Granted Parole Sparks Political Controversy In Tamil Nadu



1998 के चर्चित कोयंबटूर बम धमाकों मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 5 दोषियों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. मुख्यमंत्री विजय की सरकार के इस फैसले पर BJP ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे ‘चयनात्मक नरमी’ बताया है और पैरोल तुरंत वापस लेने की मांग की है. दूसरी ओर, सरकार के सहयोगी दलों और नेताओं ने इसे कानून के दायरे में लिया गया फैसला बताते हुए स्वागत किया है.

किन शर्तों के साथ दी गई है पेरोल?

साल 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार धमाकों में 58 लोगों की मौत हुई थी. इस मामले में 22 लोग उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. इन्हीं में से पांच दोषियों को व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर 60 दिनों की पैरोल दी गई है. पैरोल पाने वालों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोहम्मद हसन, मोहम्मद आजम और नवाब खान शामिल हैं. यह पैरोल कुछ शर्तों के साथ दी गई है.

TVK सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए VCK नेता और सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इन कैदियों के मामले को उठा रही थी. उन्होंने बताया कि 6 जून को उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात कर 22 मुस्लिम दीर्घकालिक कैदियों की रिहाई की मांग की थी. अरसु के मुताबिक, VCK के लगातार प्रयासों के बाद सरकार ने पहले चरण में पांच कैदियों को नियमों के तहत 60 दिनों की पैरोल देने का आदेश जारी किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री और कानून मंत्री का धन्यवाद भी किया.

वन्नी अरसु ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी बाकी कैदियों के लिए भी इसी तरह की राहत हासिल करने का प्रयास जारी रखेगी. उनका कहना है कि VCK तब तक इन 22 कैदियों के साथ खड़ी रहेगी, जब तक उन्हें स्थायी रिहाई नहीं मिल जाती.

बीजेपी ने विजय सरकार को घेरा

उधर, TVK विधायक मुस्तफा ने भी पांच दोषियों को पैरोल दिए जाने के फैसले का स्वागत किया. हालांकि इस मुद्दे पर BJP ने सरकार को घेर लिया है. BJP नेता वनाथी श्रीनिवासन ने सवाल उठाया कि आखिर किसकी सलाह पर और किन कारणों से इन दोषियों को पैरोल दी गई. उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसे इस बात का एहसास नहीं है कि ऐसे फैसले कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं.

वनाथी श्रीनिवासन ने कहा कि कोयंबटूर ब्लास्ट जैसे गंभीर मामले के दोषियों को पैरोल देना बेहद आपत्तिजनक है. उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना होगा कि इस फैसले के पीछे क्या सोच थी और क्या इससे सार्वजनिक शांति प्रभावित होने का खतरा नहीं है.

हालांकि इस पूरे विवाद के बीच कुछ कानूनी जानकार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पैरोल किसी भी पात्र कैदी का कानूनी अधिकार होता है और इसका मतलब सजा माफ करना नहीं है. वे यह भी याद दिला रहे हैं कि यह पहली बार नहीं है जब कोयंबटूर ब्लास्ट मामले के दोषियों को अस्थायी राहत मिली हो. इससे पहले जनवरी 2023 में इसी मामले के नौ दोषियों को अंतरिम अवकाश (इंटरिम लीव) दिया गया था.

अब यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है. एक तरफ TVK सरकार इसे नियमों के तहत लिया गया प्रशासनिक फैसला बता रही है, तो दूसरी तरफ BJP इसे जनता की भावनाओं और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताकर सवाल उठा रही है.

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