

‘कर्ज’ की कहानी रवि वर्मा से शुरू होती है, जिसकी शादी कामिनी से होती है. लेकिन कामिनी अपने पति की हत्या कर देती है और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रचती है. रवि की मौत के बाद कहानी में पुनर्जन्म का मोड़ आता है. रवि अगले जन्म में मोंटी बनकर जन्म लेता है, जो बड़ा होकर एक मशहूर गायक बनता है. जब मोंटी ऊटी जाता है, तो उसे अपने पिछले जन्म से जुड़ी कुछ घटनाएं याद आने लगती हैं. धीरे-धीरे उसे अपनी पुरानी जिंदगी, परिवार और उस महिला के बारे में पता चलता है, जिसने उसके साथ विश्वासघात किया था.
यहीं से कहानी में बदले का सिलसिला शुरू होता है. ‘एक हसीना थी, एक दीवाना था’ गाना इसी रिश्ते के दर्द और धोखे को सामने लाता है. इसकी खासियत यह है कि कहानी को गीत के जरिए इस तरह पेश किया गया है कि दर्शक किरदारों के अतीत से जुड़ने लगते हैं. यही वजह है कि यह गाना फिल्म के सबसे यादगार हिस्सों में गिना जाता है.
किशोर कुमार और आशा भोसले की आवाज ने बनाया यादगार
इस गाने को किशोर कुमार और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे, जबकि संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. गाने में रोमांस के साथ रहस्य और दर्द का ऐसा मेल है, जो इसे दूसरे प्रेम गीतों से अलग बनाता है. इसकी धुन और बोल कहानी के उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ते हैं.
‘कर्ज’ के संगीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिल्म के ‘ओम शांति ओम’, ‘पैसा ये पैसा’ और ‘दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर’ जैसे गाने भी खूब पसंद किए गए. फिल्म के संगीत के लिए लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था. वहीं, सिमी गरेवाल को कामिनी के किरदार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार का नामांकन मिला.
सुभाष घई की इस फिल्म ने उस दौर में पुनर्जन्म और बदले की कहानी को संगीत के साथ पेश किया. IMDb पर भी ‘कर्ज’ को एक ऐसी फिल्म के रूप में दर्ज किया गया है, जिसमें एक गायक को अपने पिछले जन्म में हुई हत्या की यादें सताने लगती हैं. फिल्म की कहानी और संगीत ने इसे हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में जगह दिलाई.





