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20 जुलाई को छात्रों पर हुआ पैलेट गन का इस्तेमाल? क्या होता है ये ‘ब्लाइंड वेपन’, भारत में है प्रतिबंधित? | delhi protest student protest Pellet guns were used against students on July 20 what exactly is this blind weapon


नई दिल्ली:

20 जुलाई को सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगा है. छात्रों के साथ विपक्ष का भी कहना है कि पुलिस ने पैलेट गन चलाई है, जबकि सरकार और दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया था. दरअसल पैलेट गन एक विशेष प्रकार की बंदूक होती है, जो हवा के दबाव या कारतूस के जरिए धातु या कांच के सैकड़ों छोटे-छोटे छर्रे (पैलेट) दागती है. इसका मुख्य उपयोग अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने या नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

छर्रे के एक कारतूस में लगभग 50 से 500 तक छोटे छर्रे होते हैं. ट्रिगर दबाने पर कारतूस हवा में फटता है और छर्रे एक बड़े इलाके में फैल जाते हैं. यह पारंपरिक गोलियों की तरह बारूद के बड़े विस्फोट के बजाय कंप्रेस्ड हवा या छोटे चार्ज पर काम करती है. सुरक्षा बल इसे उग्र भीड़ को रोकने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

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नजदीक से लगने पर ये छर्रे त्वचा को चीरकर अंदर घुस जाते हैं, जिससे लोगों की आंखों की रोशनी जाने या गंभीर जख्म होने का खतरा रहता है.

क्या होता है पैलेट गन?

  • पैलेट गन एक विशेष तरह की बंदूक ही होती है 
  • जो धातु या सीसे के सैकड़ों छोटे-छोटे छर्रे दागती है
  • इसमें गोलियां नहीं छर्रे होते हैं, जिन्हें पैलेट कहते हैं
  • एक कारतूस में लोहे के 50 से 500 छोटे छर्रे भरे होते हैं
  • जब भी इस पैलेट गन से इन्हें फायर किया जाता है
  • तो गन से निकला कारतूस हवा में छूटते ही फट जाता है
  • उसमें मौजूद सैकड़ों छर्रे बेहद तेज रफ्तार से निकलते हैं
  • और कारतूस से तुरंत ही एक बड़े इलाके में फैल जाते हैं
  • नजदीक से लगने पर ये छर्रे त्वचा को चीरकर अंदर घुस जाते हैं
  • जिससे छर्रे लगने वाले को गंभीर जख्म हो सकते हैं
  • सुरक्षाबल इसे उग्र भीड़ को रोकने के लिए इस्तेमाल करते हैं

भारत में 10 साल से भी पहले कश्मीर में हुए थे इस्तेमाल

जानकारी के मुताबिक, डेढ़ दशक पहले ये भारत में इस्तेमाल हुई. 2010 में जम्मू-कश्मीर में भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन चलाई. वहां 2016 में भी पैलेट गन का काफी इस्तेमाल किया गया. क्योंकि बुरहान वानी की मौत के बाद बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे. दावा है तब पैलेट गन से 700 लोगों की आंख में गंभीर चोट लगी.

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इसीलिए मानवाधिकार संगठन इसे ‘ब्लाइंड वेपन’ बताते हैं., क्योंकि आंख पर छर्रे लगने से रोशनी जाने का खतरा रहता है. विरोध के बाद केंद्र सरकार ने विकल्प तलाशने के लिए समिति बनाई, जिसकी सिफारिश पर मिर्च के तीखे अर्क वाले गोले मंजूर हुए. यानी धातु के गोले की जगह इनका इस्तेमाल करने को कहा. भारत में पैलेट गन प्रतिबंधित नहीं, लेकिन आखिरी विकल्प है.

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