

ऑनलाइन शॉपिंग के जमाने में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान व कपड़ों के साथ-साथ फल-सब्जी भी अछूते नहीं हैं. डिलीवरी एप्स के जरिए ये भी रोजाना धड़ल्ले मंगवाए जा रहे हैं, मगर क्या कभी सोचा है कि फल ऑनलाइन मंगवाना जेब पर भारी पड़ सकता है. इसकी एक बानगी सोशल मीडिया पर शेयर की गई वो पोस्ट है, जिसमें अमरूद की ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीद पर भाव में दिन-रात का अंतर सामने आया है.
एक महिला ने ऑनलाइन अमरूद मंगवाए. ऑनलाइन मंगवाने पर 109 रुपए में महज दो अमरूद भेजे गए. महिला हैरान तो तब हो गई जब वह बाजार में जाकर एक ठेले से अमरूद खरीदे. ठेले पर महज 80 रुपए में ही उसे एक किलोग्राम अमरूद मिल गए. महिला ने पूरा वाक्या सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिस ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीद को लेकर एक नई बहस छेड़ दी.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Imadvika1 नाम की यूजर ने लिखा कि उसे अमरूद खाने का मन हुआ तो उसने क्विक कॉमर्स ऐप से ऑर्डर कर दिया. कुछ ही समय में डिलीवरी भी हो गई, लेकिन जब पैकेट खोला तो उसमें केवल दो अमरूद निकले.
शाम को ठेले पर मिली बेहतर डील
यूजर ने बताया कि उसी दिन शाम को वह एक फल विक्रेता के पास पहुंची. वहां उसने 80 रुपये में 8 से 10 अमरूद खरीदे, जिनका वजन एक किलो था. दोनों खरीदारी की तुलना करने पर उसे कीमत में बड़ा अंतर नजर आया. अपने पोस्ट में यूजर ने लिखा कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ग्राहक केवल उत्पाद के पैसे नहीं चुकाता, बल्कि सुविधा, पैकेजिंग और डिलीवरी का खर्च भी देता है. यही वजह है कि कई बार ऑनलाइन सामान स्थानीय बाजार की तुलना में काफी महंगा पड़ जाता है.
Online Convenience vs Local Market 🍐
This morning, I suddenly felt like eating some guavas, so I ordered them online without thinking twice.
A while later, the delivery arrived. The total bill was ₹102.
I opened the packet and was honestly surprised
there were only 2 guavas… pic.twitter.com/k5i3rVqbUA— Advika (@Imadvika1) August 25, 2026
सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
यह पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय साझा की. कई यूजर्स ने माना कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सुविधा तो देते हैं, लेकिन कई उत्पादों पर उनकी कीमतें स्थानीय बाजार से काफी ज्यादा होती हैं. कुछ लोगों ने कहा कि फल, सब्जियों और रोजमर्रा की चीजों में यह अंतर अक्सर देखने को मिलता है.
एक यूजर ने लिखा कि ग्राहक केवल उत्पाद नहीं, बल्कि सुविधा के लिए अतिरिक्त पैसे देता है. वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि स्थानीय विक्रेता अक्सर बेहतर गुणवत्ता और अधिक मात्रा उपलब्ध कराते हैं. कुछ लोगों ने आम, सेब और केले जैसे फलों के उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने भी ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों में बड़ा अंतर देखा है.
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