

नई दिल्ली:
पहाड़ों की शांत वादियां, ठंडी हवाएं और हरियाली से घिरा एक आलीशान घर… जहां एक खुशहाल शादीशुदा कपल अपनी सुकून भरी जिंदगी जी रहा होता है. सब कुछ किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन एक दिन बगल के खाली पड़े बंगले में नया परिवार आकर बस जाता है. इसके बाद अजीब आवाजें, रहस्यमयी घटनाएं और ऐसी डरावनी हरकतें शुरू होती हैं, जिनका कोई जवाब नहीं मिलता. पहले हर कोई इसे महज भ्रम समझता है, लेकिन धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगती है. कहानी का हर मोड़ दर्शकों को उलझाता है और आखिर में राज खुलता है कि आखिर मसला क्या था. यह फिल्म है ‘द हाउस नेक्स्ट डोर’.
2017 में रिलीज हुई इस हॉरर-थ्रिलर के डायरेक्टर मिलिंद राव हैं. तमिल में इसे ‘अवल’ और तेलुगु में ‘गृहम’ नाम से रिलीज किया गया. फिल्म में सिद्धार्थ, एंड्रिया जेरेमिया, अतुल कुलकर्णी और अनीशा विक्टर अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं.
शानदार स्क्रीनप्ले ने बांधा समां
कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब पड़ोसी परिवार की बेटी जेनी अजीब और डरावनी हरकतें करने लगती है. पेशे से डॉक्टर कृष शुरुआत में इसे मानसिक बीमारी मानते हैं, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास होता है कि मामला साइंस से कहीं आगे का है. इसके बाद दोनों परिवार एक ऐसी रहस्यमयी ताकत के जाल में फंस जाते हैं, जिससे निकलना आसान नहीं होता.
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इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका स्क्रीनप्ले है. मेकर्स ने बेवजह तेज आवाजों और लगातार जंप स्केयर का सहारा लेने के बजाय कैमरा एंगल, बैकग्राउंड म्यूजिक और साइलेंस का शानदार इस्तेमाल किया है. जहां कई फिल्मों में गाने कहानी की रफ्तार रोक देते हैं, वहीं इस फिल्म में ऐसा नहीं है. शुरुआती रोमांटिक ट्रैक के बाद पूरी कहानी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती है. यही वजह है कि फिल्म धीरे-धीरे डर का ऐसा माहौल बनाती है, जो अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है.
कलाकारों की दमदार एक्टिंग बनाती है खास
सिद्धार्थ और एंड्रिया जेरेमिया ने अपने किरदारों को बेहद सहज तरीके से निभाया है. वहीं अतुल कुलकर्णी एक बेबस पिता के रूप में भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं. फिल्म की सबसे बड़ी सरप्राइज अनीशा विक्टर हैं, जिन्होंने जेनी के किरदार में ऐसा प्रभाव छोड़ा कि कई सीन्स लंबे समय तक याद रह जाते हैं.
क्लाइमैक्स में छिपा है बड़ा मैसेज
यह फिल्म सिर्फ भूत-प्रेत और डरावने घटनाक्रम तक सीमित नहीं रहती. क्लाइमैक्स में कहानी कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे को सामने लाती है, जिससे फिल्म को भावनात्मक और सामाजिक गहराई मिलती है. यही ट्विस्ट इसे एक साधारण हॉरर फिल्म से अलग पहचान देता है.
कहां देखें यह फिल्म?
अगर आपको ऐसी हॉरर फिल्में पसंद हैं जिनमें सिर्फ डर नहीं बल्कि दमदार कहानी, सस्पेंस और भावनात्मक गहराई भी हो, तो ‘द हाउस नेक्स्ट डोर’ आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए. यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर हिंदी भाषा में उपलब्ध है. हालांकि, इसमें कई डरावने सीन्स हैं, इसलिए इसे बच्चों के साथ देखने से बचना बेहतर रहेगा.





