

नई दिल्ली:
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा वंदे मातरम् गाया गया. लेकिन इस दौरान पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे (स्टैंजा) से आगे गाने पर आपत्ति जताते और रोकने की कोशिश करती नज़र आईं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी सोनिया गांधी से सहमत दिखे. हालांकि शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद राष्ट्रगीत पूरा हुआ.
बीजेपी ने कहा- यह वंदे मातरम् का अपमान
BJP ने इसे राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का अपमान करार दिया तो कांग्रेस ने सफ़ाई देते हुए कहा कि पूरा वंदे मातरम् गाया गया, इसमें कोई वाद-विवाद नहीं है. वहीं सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रगीत को रोकने की कोशिश से जुड़े सवाल पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि रोकने का कोई प्रयास नहीं था. सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के लिए कुर्सी देने के लिए कह रही थीं क्यूंकि वो लंबे समय से खड़े थे.
जयराम रमेश की दलील इसलिए गले नहीं उतरती क्योंकि वन्दे मातरम् के गायन के बाद खरगे ने झंडा फहराया और फिर करीब बीस मिनट तक खड़े रहकर भाषण दिया. इस दौरान वो बिल्कुल सहज नजर आए.
आज पूरा देश उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।
ये स्वतंत्रता दिवस… आज इसलिए और ऐतिहासिक है, क्योंकि भारत के स्वतंत्रता समर के युगांतकारी गीत, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ 14-15 अगस्त 1947 की रात स्वतंत्र भारत की पहली संविधान सभा, जब प्रारंभ हुई थी, तो इसी… pic.twitter.com/ZqMi0Dhm0v
— BJP (@BJP4India) August 15, 2026
कांग्रेस नेताओं ने तस्वीर से पर्दा उठाया
बहरहाल कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने ही राष्ट्रगीत के दौरान हुए घटनाक्रम का पूरा ब्योरा NDTV को दिया. बिहार के सासाराम से कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने साफ कहा कि सोनिया गांधी ने हमें यह बताने की कोशिश की कि हम वंदे मातरम् की शुरुआती दो पंक्तियां गाएंगे, जो हमारे महापुरुषों ने तय किया था. मनोज कुमार ने इस बात की भी पुष्टि की कि सोनिया गांधी राष्ट्रगीत बीच में रोकना चाह रही थीं.
बिहार से आने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने भी कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम में पूरे वन्दे मातरम् पर आपत्ति जताते हुए कहा, “देश में कई लोग पूरे वन्दे मातरम् को नहीं मानते. जो आज हुआ वो कांग्रेस की परंपरा में नहीं है. अच्छा लगा कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर आपत्ति जताई.”
सोनिया गांधी ने पार्टी को क्या निर्देश दिए?
सूत्रों के मुताबिक तिरंगा फहराने के बाद जब कांग्रेस के तमाम नेता पार्टी मुख्यालय के अंदर पहुंचे तो “वंदे मातरम्” को लेकर चर्चा हुई. इस दौरान सोनिया गांधी ने कहा कि अक्टूबर 1937 में कोलकाता में हुई कांग्रेस सीडब्ल्यूसी की बैठक में वंदे मातरम् के जिस हिस्से को राष्ट्रगीत के रूप में शामिल किया गया उतना ही गाना चाहिए.
थोड़ी देर बाद कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने यही बात दोहराते हुए बयान दिया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वही हिस्सा गाना चाहिए जो अक्टूबर 1937 की सीडब्ल्यूसी में तय किया गया था.
कांग्रेस मुख्यालय में पूरे वंदे मातरम् की इनसाइड स्टोरी
दरअसल नए दिशा निर्देशों के मुताबिक अब आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी छ अंतरे गाना अनिवार्य है. सूत्रों के मुताबिक इसी के मद्देनज़र ना केवल कांग्रेस मुख्यालय “इंदिरा भवन” में पूरा वन्दे मातरम् गाया गया बल्कि कांग्रेस सेवा दल के द्वारा सभी राज्य कार्यालयों के लिए भी ऐसे ही निर्देश जारी किए गए थे.
कांग्रेस कार्यालयों में ऐसे समारोह का संचालन सेवा दल द्वारा ही किया जाता है. इंदिरा भवन से पहले सुबह 24, अकबर रोड स्थित कांग्रेस के पुराने मुख्यालय में पार्टी कोषाध्यक्ष अजय माकन ने भी झंडा फहराने से पहले पूरा वन्दे मातरम् गाया गया था.
हालांकि पार्टी नेतृत्व को इस बदलाव की जानकारी नहीं थी. लिहाजा जब पूरा वंदे मातरम् गाया जाने लगा तो वो ना केवल चौंके बल्कि रोकने की कोशिश भी की.
विवाद को ढकने की कोशिश की गई लेकिन कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयानों से पूरा मामला सामने आ गया. कांग्रेस के एक उच्च सूत्र ने एनडीटीवी से कहा कि इस विवाद से बचा जाना चाहिए था.
आगे से केवल दो अंतरे गाए जाएंगे?
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने तय किया है कि आगे से कांग्रेस मुख्यालय के समारोहों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे. लेकिन कुछ पार्टी नेता नए नियमों के पालन को लेकर भी पसोपेश में हैं. ऐसे में इस विवाद को लेकर कांग्रेस के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.
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