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मॉनसून पर जुलाई में क्यों लगा ब्रेक, 26 प्रतिशत कम बरसात, कब होगी झमाझम बारिश ?, कैसे होगी भरपाई! | why monsoon break occur in india weather alert el nino impact july rain deficit



देशभर में मॉनसून की बेरुखी ने चिंता बढ़ा दी है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग IMD के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस बार मॉनसून सीजन के दौरान अब तक 26 प्रतिशत कम बारिश हुई है. जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई झमाझम बारिश के बाद दूसरे हफ्ते से ही अचानक ब्रेक लग गया है. स्थिति यह है कि देश का 56 फीसदी से अधिक हिस्सा इस समय पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में बारिश की भरपाई हो पाएगी. क्योंकि देश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों मॉनसून की रफ्तार सुस्त है. उत्तर भारत समेत कई राज्यों में बारिश न होने से उमस भरी भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों में लोग आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं. 

जुलाई में कम हुई बारिश

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक जुलाई के महीने में सामान्य तौर पर कम बारिश दर्ज हुई है. देश के कुल 36 मौसम उप-मंडलों में से 21 मंडलों में अब तक सामान्य से बेहद कम बारिश रिकॉर्ड हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि 10 जुलाई के बाद से ही मॉनसून की गतिविधियों में भारी गिरावट है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे बड़े राज्यों में इस दौरान ज्यादा बारिश नहीं हुई है. देश में सामान्य से 51 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान और पंजाब के वायुमंडल में एक विपरीत चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र सक्रिय है. यह सिस्टम समुद्र से आने वाली नमी युक्त मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने से रोक रहा है, जिससे मैदानी और पहाड़ी इलाकों में उमस भरी गर्मी बढ़ी है. 

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आंकड़ों से समझिए कितनी कम हुई बारिश 

  • मौसम विभाग के मुताबिक देश में देशभर में अब तक 227.0 मिलीमीटर बारिश हुई है, सामान्य तौर पर इस समय तक यह बारिश 298.2 मिलीमीटर होनी चाहिए थी. लेकिन इसमें अब तक 26 प्रतिशत की कमी है. 
  • उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य तौर पर अब तक 168 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए. लेकिन यहां 137 मिमी बरसात. जिसमें 19 प्रतिशत की गिरावट है. 
  • दक्षिण भारत में औसत 255.3 मिमी की तुलना में 190.0 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिसमें 26 प्रतिशत की कमी है.
  • मध्य भारत में 273 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि जरूरत 315 मिमी की थी. यहां भी 13 प्रतिशत की कमी है. 
  • पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य स्तर पर 540 मिमी के मुकाबले सिर्फ 348 मिमी बारिश हुई है. जो 36 प्रतिशत से कम है.

क्या बारिश की हो पाएगी भरपाई ?

मौसम के मिजाज को देखते हुए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में मॉनसून इस कमी को पूरा कर पाएगा. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक बारिश की भरपाई जुलाई के आखिरी 10 दिनों पर तय होगी. अगर 19 से 31 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होती तो बारिश की भरपाई कुछ हद तक पूरी हो सकती है. राहत के संकेत यह है कि  बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती सिस्टम सक्रिय हुआ है. जो हवाओं का रुख बदलेगा. इसके अलावा अगस्त महीने तक अल नीनो का प्रभाव भी कमजोर पड़ने की उम्मीद है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में होने वाली झमाझम बारिश से जुलाई के इस घाटे की काफी हद तक भरपाई हो सकती है. लेकिन सीजन के इस बड़े घाटे की पूरी भरपाई होना मुश्किल लग रहा है. 

19 से 22 जुलाई के बीच हो सकती है बारिश 

मौसम विभाग ने 19 से 22 जुलाई के बीच उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. यह बदलाव किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है.

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