मध्य प्रदेश

भोपाल: UCC की अफवाह का असर, चंद दिनों में हुए 35 हजार निकाह


मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक जानकारियों और अफवाहों का सीधा असर अब मुस्लिम समाज में देखने को मिल रहा है. भोपाल समेत पूरे प्रदेश में अचानक से निकाह (शादी) के आवेदनों की संख्या में कई गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आलम यह है कि जो परिवार अपने बच्चों की शादी कुछ समय बाद करने की योजना बना रहे थे, वे भी UCC लागू होने के डर से जल्द से जल्द काज़ियात पहुंचकर निकाह संपन्न करा रहे हैं.

भोपाल शहर के नायब काज़ी, मुफ्ती अली क़ादर हुसैनी ने इस अप्रत्याशित वृद्धि की पुष्टि की है. उनके मुताबिक, आम दिनों में काज़ियात में रोजाना करीब 30 से 40 निकाह के आवेदन आते थे, लेकिन अफवाहों के चलते अब यह संख्या अचानक बढ़कर 200 से 300 तक पहुंच गई है. पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें तो सामान्य दिनों में जहां करीब 5 हज़ार निकाह होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 35 हज़ार को भी पार कर गया है. मुफ्ती अली क़ादर लगातार मुस्लिम समाज के लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे सोशल मीडिया और अखबारों की भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और बिना पूरी जानकारी के डरें नहीं.

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क्या है अफवाह और लोगों का डर?

भोपाल और आसपास के इलाकों में मुस्लिम समाज के बीच यह अफवाह तेजी से फैल गई है कि UCC कानून लागू होने के बाद रिश्तेदारों, खासकर कजिन (चचेरे/ममेरे भाई-बहन) के बीच होने वाले निकाह पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. इसी आशंका के चलते कई परिवारों में चिंता बनी हुई है. काज़ियात पहुंच रहे लोगों का कहना है कि वे इस भ्रम में हैं कि भविष्य में ऐसे निकाह नहीं हो पाएंगे, इसलिए आनन-फानन में शादियां तय की जा रही हैं.

वक्फ बोर्ड ने किया भ्रामक दावों का खंडन

UCC को लेकर फैली इन आशंकाओं को मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है. वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि लोग UCC के प्रावधानों को पूरा पढ़े बिना ही सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी पर यकीन कर रहे हैं.

डॉ. पटेल ने समझाया कि UCC की धारा 4(4) में निषिद्ध रिश्तों के भीतर विवाह की बात जरूर कही गई है, लेकिन उसी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी धर्म की रूढ़ि, प्रथा या परंपरा ऐसे विवाह की अनुमति देती है, तो उस प्रथा के तहत विवाह पूरी तरह से मान्य रहेगा. उन्होंने बताया कि कानून के हिंदी संस्करण की एक पंक्ति में पहले जो त्रुटि थी, उसे सुधार लिया गया है. इसलिए, मुस्लिम समाज में कजिन के बीच होने वाले निकाह पर रोक लगने की बात पूरी तरह निराधार है.

काज़ी और वक्फ बोर्ड दोनों ने ही आम जनता से अपील की है कि अफवाहों के बहकावे में आकर जल्दबाजी में फैसले न लें, बल्कि कानून के वास्तविक प्रावधानों को समझें.

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