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‘भारत में 2012 में बुक अपार्टमेंट 2032 में मिलेगा’ हॉटमेल फाउंडर के सवाल से रियल एस्टेट में छिड़ी बहस | Hotmail Founder Sabeer Bhatia booked apartments in India delay 2032 sparks debate in real estate sector


हॉटमेल फाउंडर सबीर भाटिया ने भारत में अपने सपनों का घर एक दशक से भी ज्यादा समय पहले बुक किया था. अब एक दशक से ज्यादा समय होने के बाद सबीर भाटिया का कहना है कि वह अभी भी घर की चाबियों का इंतजार कर रहे हैं. सबीर भाटिया ने बताया है कि साल 2012 में बुक किए गए एक अल्ट्रा-लक्जरी अपार्टमेंट 2032 में ही मिलने की उम्मीद है. अब इसके इंतजार का समय बढ़कर पूरे 20 साल हो गए हैं. वहीं भाटिया के इस सवाल पर रियल एस्टेट में बहस छिड़ गई है.

दरअसल, हॉटमेल फाउंडर सबीर भाटिया ने अपने एक्स पोस्ट में अपनी परेशानी शेयर करते हुए सवाल उठाया कि क्या इतने लंबे इंतज़ार को कभी सही ठहराया जा सकता है. उनकी पोस्ट तेज़ी से वायरल हुई और इससे रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के सामने आने वाली चुनौतियों पर बड़ी बहस छिड़ गई.

अपनी पोस्ट में 57 साल के सबीर भाटिया ने लिखा, ‘मैंने 2012 में भारत में एक अल्ट्रा-लक्ज़री अपार्टमेंट बुक किया था. इस प्रोजेक्ट में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. मुझे बताया गया है कि अब मुझे इसका कब्ज़ा 2032 में मिलेगा.’

घर खरीदने वालों के लिए ‘पज़ेशन’ वह स्टेज है जब बिल्डर पूरी तरह से तैयार अपार्टमेंट को आधिकारिक तौर पर उन्हें सौंपता है. चूंकि कई घर प्रोजेक्ट के बनने के दौरान ही बिक जाते हैं, इसलिए खरीदारों को अक्सर रहने के लिए आने से पहले कई साल इंतज़ार करना पड़ता है. हालांकि, दो दशक की देरी बहुत ही असामान्य बात है. जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, कई यूज़र्स ने अपनी राय दी, जिससे भाटिया भी चर्चा में शामिल हो गए.

भारत असल में तरक्की नहीं कर रहा- भाटिया

भाटिया की इस पोस्ट पर एक यूज़र ने लिखा, एक ऐसा स्कैम जिसमें आपको असल कीमत से 4 गुना ज़्यादा पैसे देने पड़ते हैं, साथ ही 20 साल का किराया भी. अगर आप वही पैसे सबसे खराब इन्वेस्टमेंट यानी FD में भी लगाते, तो वे चार गुना हो जाते. बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट में भी 1 करोड़ रुपये 20 साल में 8 करोड़ रुपये बन जाते हैं. इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए भाटिया ने लिखा, “यह अनुभव मुझे बताता है कि भारत असल में तरक्की नहीं कर रहा है…”

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मकान मिलने तक मैं बूढ़ा हो जाऊंगा

एक और यूज़र ने मज़ाक में कहा, 20 साल इंतज़ार करना तो अल्ट्रा-लक्ज़री है! यह तो एक लव स्टोरी है!” भाटिया ने जवाब दिया, “जब तक मुझे यह मिलेगा, मैं बूढ़ा हो चुका हूंगा. मैंने इसे तब बुक किया था जब मैं युवा था और भारत में अपना एक शोकेस बेस बनाना चाहता था.

एक तीसरे यूज़र ने कहा, कम से कम आपके पास तारीख तो है; ऐसे लाखों फ़्लैट खरीदार हैं जिनकी मेहनत की कमाई बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण फंसी हुई है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाटिया ने कहा, “यह अच्छी ख़बर नहीं है. दुर्भाग्य से, भारत एक ऐसा देश बन गया है जहां लेन-देन में ज़रा भी भरोसा नहीं रहा.

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