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भारत का ‘दिव्यास्त्र’ तैयार, बिना रनवे और लॉन्च पैड के उड़ान, बॉर्डर पर दुश्मन के लिए बनेगा काल | India Indigenous Divyastra Mk3 Completes First Flight Jet-Powered Loitering Munition Boosts Defence Capability


भारत की स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी ने एक और बड़ी छलांग लगाई है. प्राइवेट डिफेंस कंपनी ने भारत के पहले स्वदेशी जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन ‘दिव्यास्त्र Mk3’ की सफल पहली उड़ान पूरी की है. इस सिस्टम को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है. यह एक तरह का ड्रोन है.सबसे खास बात यह है कि दिव्यास्त्र को सेना की गाड़ी के जरिए ही लॉन्च किया जा सकता है. यानी इसे लॉन्च करने के लिए किसी बड़े लॉन्च पैड या रनवे की जरूरत नहीं है. इसे बॉर्डर इलाके में तैनात करना आसान होगा.

दिव्यास्त्र Mk3 की पहली उड़ान सफल

दिव्यास्त्र Mk3 को लखनऊ स्थित Kawa UAV प्राइवेट लिमिटेड (HoverIt) ने डेवलेप किया है. दिव्यास्त्र में स्वदेशी जेट इंजन लगाया गया है. दिव्यास्त्र Mk3 ने 11 अगस्त 2026 को अपनी पहली सफल उड़ान पूरी की. कंपनी के अनुसार, इसमें DG Propulsion द्वारा डेवलेप स्वदेशी जेट इंजन लगाया गया है. इसकी खासियत यह है कि इसके निर्माण में किसी विदेशी जेट इंजन या महत्वपूर्ण सब-सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया है. कंपनी ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है.

क्या है लॉइटरिंग म्यूनिशन?

लॉइटरिंग म्यूनिशन ऐसे हथियार होते हैं जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडराते रहते हैं और लक्ष्य मिलने पर सटीक हमला करते हैं. इन्हें अक्सर ‘कामिकाजे ड्रोन’ या ‘सुसाइड ड्रोन’ भी कहा जाता है. दिव्यास्त्र Mk3 का जेट-पावर्ड होना इसे पारंपरिक प्रोपेलर आधारित सिस्टम की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी बना सकता है.

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मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म की बढ़ती अहमियत

रूस-यूक्रेन युद्ध और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे आधुनिक युद्धों ने दिखाया है कि बड़े और स्थायी लॉन्च पैड की तुलना में मोबाइल लॉन्च सिस्टम अधिक प्रभावी साबित होते हैं. यही वजह है कि नई पीढ़ी के भारतीय सिस्टम ऐसे डिजाइन किए जा रहे हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर फ्रंट लाइन के पास से तेजी से तैनात किया जा सके.

बिना रनवे के मिशन पर रवाना हो सकता है दिव्यास्त्र

दिव्यास्त्र Mk3 की सबसे बड़ी संभावित खासियत यह मानी जा रही है कि इसे कम तैयारी समय के साथ मोबाइल प्लेटफॉर्म से संचालित किया जा सकता है. इस तरह के सिस्टम फ्रंट लाइन पर तैनात सैन्य वाहनों के साथ तेजी से स्थान बदल सकते हैं और दुश्मन के बंकर, कमांड पोस्ट या अन्य लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकते हैं. लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और तवांग जैसे दुर्गम इलाकों में जहां बड़े एयरबेस या रनवे उपलब्ध नहीं होते, वहां ऐसे सिस्टम तेजी से तैनात किए जा सकते हैं.

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