

भारत में आयोजित हो रहे BRICS समिट पर दुनियाभर की नजरें हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली आर्थिक गुट ‘BRICS’ में शामिल होने के लिए पूरा जोर लगाया था. लेकिन उसका प्रयास सफल नहीं हो सका है. खास बात यह है कि पाकिस्तान ने इसके लिए अलग-अलग प्रयास भी किए हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वर्ल्ड बैंक का पाकिस्तान पर ज्यादा कर्ज हो चुका है, इससे निकलने और पाकिस्तान ने BRICS समर्थित ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ में 580 मिलियन डॉलर यानि करीब 58 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम हिस्सेदारी तक खरीद ली थी. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसका दांव काम आएगा. लेकिन भारत के वीटो की वजह से उसकी नहीं चली और पाकिस्तान को ब्रिक्स में एंट्री नहीं मिल सकी.
2023 में पाकिस्तान ने दिया था आवेदन
पाकिस्तान ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए 2023 में आवेदन दिया था. लेकिन पाकिस्तान का प्रयास सफल नहीं हो सका है. इस्लामाबाद का मानना है कि ब्रिक्स में शामिल होने से उसे अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने, नए व्यापारिक अवसर तलाशने और वैश्विक मंच पर अपनी बात रखने का एक मजबूत मंच मिल सकता है. वर्तमान में पाकिस्तान के अलावा तुर्की, बांग्लादेश और वियतनाम समेत 30 से अधिक देश इस समूह का हिस्सा बनने की रेस में शामिल हैं. लेकिन पाकिस्तान इस रेस में फिलहाल पीछे ही नजर आ रहा है.
चीन-रूस का समर्थन, लेकिन भारत का रुख सख्त
पाकिस्तान की ब्रिक्स में एंट्री को लेकर चीन और रूस की तरफ से भी सकारात्मक संकेत मिल चुके हैं. रूस में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद खालिद जमाली ने तो सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनका देश समर्थन के लिए रूस और चीन के लगातार संपर्क में है. लेकिन भारत का विरोध उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा रहता है. लेकिन ब्रिक्स में कुछ ऐसे नियम हैं, जिसकी वजह से पाकिस्तान को एंट्री मिलना मुश्किल है.
ब्रिक्स का यह नियम पाकिस्तान के लिए मुश्किल
दरअसल, BRICS का सबसे अहम नियम यह है कि नए सदस्यों को जोड़ने के लिए सभी मौजूदा देशों की सर्वसम्मति जरूरी है. यानि अगर किसी नए देश को इसका सदस्य बनाना है, तो ब्रिक्स में शामिल सभी देशों की सहमति होना जरूरी है. ऐसे में भारत के वीटो की वजह पाकिस्तान के सारे प्रयासों पर पानी फिर जाता है.
क्यों ब्रिक्स में एंट्री चाहता है पाकिस्तान
दरअसल, BRICS का तेजी से विस्तार हो रहा है. यह ग्लोबल साउथ का मजबूत मंच बन चुका है. BRICS का विस्तार होकर अब यह ‘BRICS+’ बन चुका है, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे नए सदस्य शामिल हो चुके हैं. विस्तारित ब्रिक्स अब दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी और क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. दूसरी ओर इस समूह के भीतर भारत का व्यापार तेजी से बढ़ा है. ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात 48.8 प्रतिशत बढ़कर 64.3 अरब डॉलर से 95.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. यही वजह है पाकिस्तान इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से जुड़ना चाहता है.
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