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बच्चों को झूठ बोलने से रोकने के लिए क्या करें? Parenting Coach ने बताया सबसे आसान तरीका | How to stop children from lying Parenting Coach Shares easy tips baccho ke jhoot bolne ki aadat kaise chhudayen



हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सच बोले और ईमानदार बने. लेकिन कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों पर भी झूठ बोल देते हैं. ऐसे में ज्यादातर माता-पिता का यही सवाल होता है कि बच्चों की इस आदत को कैसे छुड़वाएं या  क्या ऐसा किया जाए कि बच्चा हर बात का सच जवाब दे? अगर आपके मन में भी ये सवाल है, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. इसे लेकर मशहूर पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में पेरेंटिंग कोच ने सबसे आसान और असरदार तरीका बताया है. आइए जानते हैं इस बारे में- 

क्या कहती हैं पेरेंटिंग कोच?

रिद्धि देवराह बताती हैं, जब भी बच्चे किसी बात को लेकर झूठ बोलते हैं, तो ज्यादातर पेरेंट्स गुस्सा हो जाते हैं और तुरंत पूछने लगते हैं, ‘सच-सच बताओ, क्या तुमने ऐसा किया?’ इस तरह के सवाल ही कई बार बच्चे को सच बोलने के बजाय झूठ बोलने के लिए मजबूर कर देते हैं. 

फिर क्या है सही तरीका?

पेरेंटिंग कोच के मुताबिक, अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बिना डरे सच बोले, तो सबसे पहले आपको अपना तरीका बदलना होगा. बच्चों को डरा कर नहीं, बल्कि भरोसा देकर ईमानदारी सिखाई जा सकती है. कई बार जब बच्चे से कोई खिलौना टूट जाता है, जूस गिर जाता है या दीवार पर रंग लग जाता है, तो वह तुरंत कह देता है, ‘मैंने नहीं किया.’ इसका मतलब यह नहीं होता कि वह हमेशा झूठ बोलना चाहता है. कई बार वह सिर्फ इसलिए सच नहीं बताता क्योंकि उसे डर होता है कि मम्मी-पापा डांटेंगे, गुस्सा करेंगे या सजा देंगे. उस समय बच्चा यह नहीं सोच रहा होता कि सच बोलना चाहिए या नहीं. उसके मन में बस यही चलता है कि अगर सच बता दिया तो आगे क्या होगा.

सवाल पूछने का तरीका बदलें

रिद्धि देवराह का कहना है कि बच्चे से सीधे ‘क्या तुमने ऐसा किया?’ पूछने के बजाय यह कहना ज्यादा अच्छा है, ‘लगता है यहां कुछ हुआ है, मुझे बताओ क्या हुआ.’ इस तरह बात करने से बच्चे पर दबाव नहीं पड़ता. उसे अपनी बात आराम से बताने का मौका मिलता है और यहां वो ज्यादातर मामलों में खुद ही सच बता देता है.

गलती पर डांट नहीं, समझाएं

पेरेंटिंग कोच कहती हैं, हर बच्चा कभी न कभी गलती करता है. अगर हर गलती पर उसे सिर्फ डांट या सजा मिलेगी, तो वह अगली बार अपनी गलती छिपाने की कोशिश करेगा. लेकिन अगर माता-पिता पहले उसकी बात सुनें और फिर प्यार से समझाएं कि आगे क्या करना चाहिए, तो बच्चा अपनी गलती से सीखता भी है और सच बोलने से डरता भी नहीं है.

घर का माहौल भरोसे वाला बनाएं

बच्चे वहां सबसे ज्यादा खुलकर बात करते हैं, जहां उन्हें डर नहीं बल्कि अपनापन महसूस होता है. इसलिए कोशिश करें कि घर में ऐसा माहौल बने, जहां बच्चा अपनी गलती बताने से न घबराए. जब उसे लगेगा कि उसकी बात सुनी जाएगी और उसे समझाया जाएगा, तब वह सच बोलने की आदत खुद ही विकसित कर लेगा.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
 






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