खबर

जूनोटिक बीमारियों से निपटने के लिए बनेगा राष्ट्रीय एक्शन प्लान  | National action plan to be prepared to deal with zoonotic diseases



जूनोटिक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाएगी. इसके तहत ये तय होगा कि आने वाले समय में देश में जूनोटिक बीमारियों को रोकने, उनकी समय पर पहचान करने और उनके फैलाव को नियंत्रित करने के लिए कौन-सा विभाग क्या काम करेगा और कब करेगा. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने योजना को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई. मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्ययोजना में शासन व्यवस्था, रोग निगरानी प्रणाली, प्रयोगशालाओं को मजबूत करना, आपदा तैयारी, बीमारी फैलने पर त्वरित कार्रवाई, जनजागरूकता, शोध, नवाचार, निगरानी और वित्तीय व्यवस्था जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा. इसके आधार पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपनी जरूरत के अनुसार राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार कर सकेंगे. 

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के निदेशक प्रो. (डॉ.) रंजन दास के अनुसार, एकीकृत रोग निगरानी प्रणाली (IDSP) को भी और मजबूत किया जाएगा ताकि संभावित महामारियों और बीमारियों के बारे में तेजी से पता लगाया जा सके. इससे समय पर त्वरित कार्रवाई करके प्रकोप को फैलने से रोका जा सकेगा.

वन हेल्थ प्रोग्राम पर जोर

सरकार ने राष्ट्रीय “वन हेल्थ” कार्यक्रम के तहत दो नए तकनीकी संसाधन लॉन्च किए हैं. ये 10 प्राथमिकता वाले जूनोटिक रोगों पर लर्निंग रिसोर्स पैकेज और ई-लर्निंग मॉड्यूल्स हैं. इन संसाधनों का मकसद डॉक्टरों, पशु चिकित्सकों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य फ्रंटलाइन कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण देना है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि जूनोटिक बीमारियां आज भी भारत सहित विश्व के लिए बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौती है. यही वजह है कि केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक निगरानी प्रणाली, मजबूत लैब नेटवर्क, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने की दिशा में काम कर रही है.

इन बीमारियों को दी गई प्राथमिकता

सरकार ने निपाह, एमपॉक्स, रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, जीका वायरस संक्रमण, एन्थ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस, क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) और क्राइमियन-कांगो हेमरेजिक फीवर (CCHF) जैसी जूनोटिक बीमारियों को लर्निंग रिसोर्स पैकेज में शामिल किया गया है.

AI और डिजिटल तकनीक का होगा उपयोग

मंत्रालय ने राष्ट्रीय एक्शन प्लान के मसौदे पर विस्तार से चर्चा के लिए विशेषज्ञों के साथ बैठक भी की. इसमें विशेषज्ञों ने सरकार से कहा है कि एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP 2.0) के जरिए रोग निगरानी को मजबूत हों, अधिक सेंटिनल सर्विलांस केंद्र बनाए जाएं, लैब नेटवर्क का विस्तार हो और विभिन्न विभागों के बीच समय पर डेटा साझा किया जाए. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल हो, जिसकी मदद से बीमारी का समय रहते पता लगाने और भविष्य में संभावित प्रकोप का अनुमान लगाने की क्षमता विकसित की जाए. मंत्रालय के अनुसार, सुझावों को अंतिम राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी साथ ही भविष्य में महामारी जैसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा.

जूनोटिक रोग किसे कहते हैं?

जूनोटिक बीमारी एक संक्रामक रोग हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं. ये बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या कवक के कारण होते हैं. आमतौर पर ये रोग सीधे संपर्क, दूषित भोजन/पानी, या मच्छरों जैसे वाहकों के काटने से फैल सकते हैं.




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button