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पुराने तेवर में ही लौटे आकाश आनंद, राहुल-अखिलेश पर निशाना तो चंद्रशेखर क्यों हुए खामोश | Akash Anand Targets Rahul Gandhi Akhilesh Yadav BSP Bets on Gen Z Politics Ahead of UP Election 2027


नई दिल्ली:

नीट पेपर लीक को मुद्दा बनाकर शुरू हुए आंदोलन की वजह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. इसे इस आंदोलन की बड़ी जीत बताया गया. यह भारत में जेन-जी का पहला बड़ा आंदोलन था, जिसने एक केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर किया. इसके बाद से देशभर के राजनीतिक दलों में जेन-जी के समर्थन में खड़े होने की होड़ लग गई. इस दिशा में सबसे नई पहल बहुजन समाज पार्टी ने की है. बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद का एक भाषण इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें वो राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अंकल कहकर संबोधित करते हुए सुने जा सकते हैं. आकाश आनंद बसपा का युवा चेहरा हैं. विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने आकाश आनंद को मैदान में उतार कर अपने चुनाव अभियान की मुनादी कर दी है. बसपा को उम्मीद है कि आकाश युवाओं को पार्टी से जोड़ पाएंगे. 

जेन जी की राह चले आकाश आनंद

आकाश आनंद 10 अगस्त को उत्तर प्रदेश के हाथरस के सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित किया. इसमें उन्होंने कहा कि युवाओं को सोच-समझकर ऐसे नेता और राजनीतिक दल को चुनना चाहिए, जो उनके भविष्य के लिए लड़ सके. जनसभा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी उसी पीढ़ी से आते हैं, जिसने इन मुद्दों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था.उन्होंने कहा कि केवल प्रदर्शन करने से सरकार नहीं बदलती है. प्रदर्शन करना जरूरी है, लेकिन उसके बाद राजनीतिक कार्रवाई भी होनी चाहिए.उन्होंने कहा कि नीतियां नहीं बदलीं, व्यवस्था नहीं बदली और नीट पेपर से जुड़ी समस्याएं भी खत्म नहीं हुईं. आपका भविष्य आज भी वैसा ही है.

आकाश आनंद 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार यूपी में कोई चुनावी रैली संबोधित करते हुए नजर आए.

आकाश आनंद 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार यूपी में कोई चुनावी रैली संबोधित करते हुए नजर आए.

अखिलेश यादव को क्यों बताया अंकल

सादाबाद की जनसभा में आकाश आनंद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया.उन्होंने कहा, ”सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश अंकल जी का पूरी इज्जत और आदर सम्मान से उनका नाम ले रहा हूं. मैं 30 साल का लड़का अगर 50 साल के आदमी को अंकल नहीं कहूंगा तो क्या कहूंगा, आप ही बताइए.”आकाश आनंद ने इस तरह से खुद को जेन जी नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की. उल्लेखनीय है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव, उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव और पार्टी के दूसरे सांसद और नेता छात्रों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में काफी सक्रिय नजर आए थे. लेकिन बसपा ने आंदोलन का केवल नैतिक समर्थन किया था. पार्टी प्रमुख मायावती ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी.दिल्ली के बाद झारखंड में भी छात्र संघर्ष कर रहे हैं.छात्रों का विरोध-प्रदर्शन बढ़ता देख बसपा नेता ने युवाओं और उनके मुद्दों पर फोकस करना शुरू किया है. इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करने के रूप में देखा जा रहा है. 

चंद्रशेखर आजाद पर क्यों चुप रहे आकाश आनंद

आकाश आनंद ने सादाबाद में राहुल, अखिलेश और बीजेपी पर तो हमला बोला लेकिन आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का नाम नहीं लिया. उनके बारे में वो एक शब्द भी नहीं बोले. इसे बसपा की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है. उसे लगता है कि चंद्रशेखर आजाद पर हमला करने से युवा बसपा से दूर हो सकते हैं,क्योंकि चंद्रशेखर के समर्थकों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है. 

इस जनसभा में आकाश आनंद ने बीजेपी की उत्तर प्रदेश सरकार को महंगाई, कानून व्यवस्था और एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को लेकर घेरा. उन्होंने शिक्षा और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार को जोड़ा. उन्होंने लोगों से उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार से पिछले 10 साल का हिसाब मांगने की अपील की. इसके साथ ही उन्होंने सपा को उसकी सरकार में हुए मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर घेरा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनते ही दंगे शुरू हो गए थे. 

साल 2024 में मायावती ने आकाश आनंद को अपरिपक्व बताते हुए सभी पदों से बह

साल 2024 में मायावती ने आकाश आनंद को अपरिपक्व बताते हुए सभी पदों से हटा दिया था.

आकाश आनंद का आक्रामक तेवर

आकाश आनंद  ने करीब ढाई साल बाद चुनावी मैदान में वापसी की है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद आक्रामक अंदाज में चुनाव रैलियों को संबोधित किया था. उनके भाषण के दौरान लोग जोरदार तरीके से ताली बजाते थे. लोग आकाश आनंद के इस रूप के बसपा के राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत सही मानते थे. सीतापुर की एक रैली में उनके भाषण को लेकर एक मामला दर्ज हुआ था. इसके बाद ही पार्टी प्रमुख मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्यवयक और अपने उत्तराधिकारी पद से हटा दिया था. उनका कहना था कि आकाश आनंद में अभी परिपक्व नहीं हुए हैं. बाद में उन्हें पार्टी में फिर शामिल किया गया था. सोमवार को सादाबाद में वो अपने पुराने तेवर के साथ ही नजर आए.

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