

नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड्स में ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाली जानकारी पैकेट के सामने लिखने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस उद्देश्य को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से अब तक उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि लेकिन जिस उद्देश्य को हम हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुंचना चाहते हैं. उसे सार्थक रूप देने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI से कहा कि हमने अब तक आपने जो कुछ किया है, उसकी सराहना करते हैं और आपकी पहल की भी सराहना करते हैं. पीठ ने कहा कि वह जो भी अंतिम आदेश पारित करेगी, वह FSSAI पर बाध्यकारी होगा और प्राधिकरण से आदेश को पूरी गंभीरता से लागू करने की अपेक्षा है. FSSAI के नए प्रस्ताव को लागू करने की समयसीमा पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए. जस्टिस पारदीवाला ने पूछा कि एक साल तक स्वैच्छिक अनुपालना की जरूरत क्यों है?
इसमें इतना समय क्यों लगना चाहिए ?
पीठ ने यह भी सवाल किया कि प्राधिकरण फिर से सुनवाई और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया क्यों शुरू करना चाहता है, जबकि इस मुद्दे पर प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हो चुकी थी. जस्टिस पारदीवाला ने सवाल किया – जब हमने 2022 में शुरुआत की थी, तो पिछले चार वर्षों में आपने क्या किया? FSSAI की ओर से जवाब दिया गया कि 2022 में शुरू की गई प्रक्रिया स्टार रेटिंग सिस्टम से संबंधित थी और उस समय इस्तेमाल किया गया मानदंड पूरी तरह अलग था.
हमारे आदेश का पालन होगा
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि जब अदालत स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को लेकर इतनी चिंतित है, तो इतना समय क्यों लगाया जा रहा है? पीठ ने संकेत दिया कि अंतिम आदेश पारित करने के बाद मामले को कुछ समय बाद अनुपालना रिपोर्ट के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा और FSSAI को अदालत के हर निर्देश का पालन करना होगा. जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अदालत को उम्मीद है कि प्राधिकरण देश और नागरिकों के व्यापक हित में आदेश का अक्षरशः पालन करेगा.
हमें नाराज मत करिए
सुनवाई के अंत में जस्टिस पारदीवाला ने हल्के लेकिन स्पष्ट अंदाज में कहा कि अदालत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनका आशय वास्तव में यह था कि “हमें नाराज मत कीजिए”, लेकिन उन्होंने इसके लिए बेहतर शब्दों में कहा, हमें निराश मत कीजिए.





