

राजस्थान में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत का सिलसिला रुक नहीं रहा है. कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में प्रसूता की मौत की घटना सामने आई है. जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता की रविवार देर रात मौत हो गई. महिला की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी. जिसके बाद ज्यादा ब्लीडिंग की वजह उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. करीब 25 दिनों तक जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में चले इलाज के बाद आखिर उसने दम तोड़ दिया.
24 जून को हुई थी डिलीवरी
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि लगातार प्रसुताओं के बेहतर इलाज को लेकर डॉक्टरों की टीम पूरी मुस्तैदी से इलाज कर रही है. महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टर फतेह सिंह भाटी ने NDTV से बातचीत में बताया कि तीन प्रसूताएं महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती हैं, जो (सामू देवी) उम्मेद अस्पताल से रेफर होकर आई थी, उसकी रविवार देर रात मौत हो गई.
सामू देवी को 27 जून को महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती हुई थी. उसका उपचार चल रहा था, लेकिन रविवार देर रात उसकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि 24 जून को सोमू देवी को लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) शुरू हुआ और उसे PHC तिंवरी में भर्ती कराया गया. जहां पर नॉर्मल डिलीवरी से बच्ची को जन्म दिया. इसके बाद उसकी ब्लीडिंग शुरू हो गई. जिस पर इलाज के लिए उम्मेद अस्पताल (Umaid Hospital) रेफर कर दिया गया.
ज्यादा ब्लीडिंग और खून की भारी कमी के कारण लगातार हालत बिगड़ती गई. इसके बाद ऑपरेशन करके उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी. इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ औरउम्मेद अस्पताल के डॉक्टर ने महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया.
महिला की लागत बिगड़ती गई हालत
जिस पर उसे 27 जून को सुबह 10 बजे मरीज़ को महात्मा गांधी अस्पताल के ICU में शिफ्ट किया गया. इस दौरान डायलिसिस चलता रहा है. 15 जुलाई को मरीज़ को कई बार उल्टी होने पर जांच के बाद एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी की गई. जिसमें छोटी आंत के गैंग्रीन वाले हिस्से को काटकर निकाला गया और प्रॉक्सिमल एंड इलियोस्टोमी की गई. इस दौरान महात्मा गांधी अस्पताल में करीब 25 दिन तक चले इलाज के बाद 19 जुलाई देर रात 1:44 बजे महिला की मौत हो गई.
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