

नई दिल्ली:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने आगामी फिल्म ‘फौजी’ के निर्देशक की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि फिल्म में नेताजी और एडोल्फ हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से पेश किया गया है. उन्होंने निर्देशक से देशवासियों से माफी मांगने की भी मांग की. आईएएनएस से बातचीत में चंद्र कुमार बोस ने कहा कि फिल्मकारों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और उसके नेताओं को पर्दे पर दिखाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए.
नेताजी सुभाष के प्रपौत्र ने क्या कहा
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय नायकों से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और कल्पना का सहारा लेना मेरे हिसाब से एक अपराध है.” उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में नेताजी और हिटलर की मुलाकात को गलत तरीके से दिखाया गया है, जिससे नेताजी के व्यक्तित्व की गरिमा कम होती है. नेताजी और हिटलर की मुलाकात के ऐतिहासिक संदर्भ पर बात करते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि नेताजी भारत की आजादी के लिए समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से हिटलर से मिले थे.
उन्होंने कहा, “नेताजी का मानना था कि उस समय जर्मनी के हिटलर और जापान के हिदेकी तोजो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को सहयोग दे सकते थे.” उन्होंने कहा कि नेताजी फासीवाद के कट्टर विरोधी थे और लोकतंत्र तथा लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास रखते थे. चंद्र कुमार बोस के अनुसार, नेताजी ने हिटलर के साथ कभी अधीनस्थ की तरह व्यवहार नहीं किया, बल्कि बराबरी के स्तर पर बातचीत की और भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन मांगा. उन्होंने दावा किया कि हिटलर ने नेताजी के देशप्रेम को पहचाना था और उन्हें समर्थन देने पर सहमति जताई थी. इसमें वह पनडुब्बी भी शामिल थी, जिसके जरिए नेताजी दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंचे थे.
हिटलर के बारे में बोलते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि उसकी आत्मकथा ‘मीन कैम्फ’ में भारत को लेकर व्यक्त विचार यह दिखाते हैं कि उसे भारत के इतिहास, विरासत और संस्कृति की पर्याप्त समझ नहीं थी. उन्होंने कहा कि दोनों नेता शुरुआत में अपने-अपने देशों के हितों के लिए काम कर रहे थे, लेकिन बाद में हिटलर सत्ता के अहंकार में डूब गया.
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प्रभास की फौजी का विवाद
चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया कि फिल्म ‘फौजी’ के निर्देशक ने ऐतिहासिक तथ्यों को सही संदर्भ में दिखाने के बजाय विवाद पैदा करने के लिए नेताजी और हिटलर की मुलाकात को सनसनीखेज तरीके से पेश किया है. उन्होंने कहा कि नेताजी का व्यक्तित्व बहुत महान था और उन्हें ऐसे तरीके से नहीं दिखाया जाना चाहिए जिससे उनकी छवि छोटी लगे. उनके अनुसार, फिल्म में नेताजी और हिटलर के संबंधों की वास्तविकता को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया है.
उन्होंने कहा, “निर्देशक को भारत की जनता और उन सभी लोगों से माफी मांगनी चाहिए जो देश के स्वतंत्रता संग्राम का सम्मान करते हैं.” फिल्म के ट्रेलर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. आलोचकों का आरोप है कि इसमें अभिनेता प्रभास द्वारा निभाए गए काल्पनिक किरदार को नेताजी द्वारा हिटलर से परिचय कराते हुए दिखाया गया है, जिससे काल्पनिक पात्र को अधिक महत्व और नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका को कमतर दिखाने की कोशिश की गई है. ‘फौजी’ एक पीरियड वॉर-एक्शन फिल्म है, जिसका निर्देशन और लेखन हनु राघवपुड़ी ने किया है.
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