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निंबालकर मर्डर केस में सुनेत्रा पवार के भाई समेत सभी आरोपी बरी, उद्धव के बागी सांसद को झटका; बदलेंगे फैसला? | Nimbalkar murder case All accused including Padamsinh Patil acquitted by CBI court setback to Shivsena UBT MP Omraje


नई दिल्ली:

महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला आया है. मुंबई की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मामले में हत्याकांड के मुख्य आरोपी पूर्व गृहमंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटिल समेत सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया है. 2006 में कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पिछले 20 सालों से यह मामला कोर्ट में चल रहा था. निंबालकर परिवार के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. स्वर्गीय पवनराजे निंबालकर के बेटे और उद्धव गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर पिछले 20 सालों से यह मामला लड़ रहे हैं.  

20 सालों की कानूनी लड़ाई का अंत

महाराष्ट्र में पिछले 20 सालों से पवनराजे निंबालकर की हत्या का मामला चर्चा में रहा है. ऐसे में 20 जून को आया फैसला एक लंबी चली कानूनी लड़ाई का अंत माना जा रहा है. इस फैसले से पहले निंबालकर और पाटिल दोनों परिवारों को समर्थक कोर्ट के बाहर जमा हुए थे. पवनराजे निंबालकर के बेटे और शिवसेना (UBT) के सांसद ओमराजे निंबालकर अपने पूरे परिवार के साथ कोर्ट पहुंचे थे. वह सुबह ही पुणे से मुंबई के लिए रवाना हो गए थे. जबकि पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल भी अपने परिवार के साथ कोर्ट में मौजूद थे. जिन पर इस हत्या का आरोप था. लेकिन आज उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया है. 

पद्मसिंह पाटिल के साथ-साथ अन्य आरोपी लातूर के सतीश मंदाडे, पूर्व नगरसेवक मोहन शुक्ला, पारसमल जैन, पूर्व आबकारी निरीक्षक (एक्साइज इंस्पेक्टर) शशिकांत कुलकर्णी और बसपा कार्यकर्ता कैलाश यादव भी इस मामले में आरोपी थे. पवनराजे और उनके ड्राइवर समद काजी पर फायरिंग करने वाले दिनेश तिवारी, पिंटू सिंह और छोटे पांडे ये तीनों भी इसी मामले में आरोपी थे. लंबी चली कानूनी प्रक्रिया के बाद यह फैसला अहम माना जा रहा है. 

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सुनेत्रा पवार के भाई हैं डॉ. पद्मसिंह पाटिल

पवनराजे निंबालकर केस में मुख्य आरोपी डॉ. पद्मसिंह बाजीराव पाटिल महाराष्ट्र के सीनियर नेता रहे हैं. वह महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भाई हैं. पाटिल महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और राज्य के गृहमंत्री भी रह चुके हैं. पाटिल ने महाराष्ट्र में अलग-अलग सरकारों में 20 से अधिक वर्षों तक काम किया और गृह, सिंचाई, ऊर्जा और राज्य आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है. वह  धाराशिव निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं. 2006 में हुए निंबालकर हत्याकांड में उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया था. लेकिन आज के फैसले में सीबीआई अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है. 

महाराष्ट्र की राजनीति पर होगा असर 

दरअसल, इस केस का महाराष्ट्र की राजनीति पर भी असर होना तय माना जा रहा है. स्वर्गीय पवनराजे निंबालकर के सांसद बेटे ओमराजे उद्धव गुट छोड़कर शिंदे गुट में जाने वाले 6 सांसदों की लिस्ट में शामिल हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि उनके पक्ष में यह फैसला आ सकता है, इसलिए वह पाला बदल रहे हैं. हालांकि ओमराजे ने इस तरह के सभी आरोपों को निराधार बताया था. उन्होंने कहा था कि वह 20 सालों से यह केस लड़ रहे हैं. लेकिन अब जब यह फैसला निंबालकर परिवार के विरोध में आया है तो ओमराजे आगे क्या फैसला लेते हैं. यह दिलचस्प हो सकता है. 

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अनुज रायते

संवाददाता

अनुज रायते मुंबई के एक सीनियर करस्पॉन्डेंट (वरिष्ठ संवाददाता) हैं, जो राजनीति, नागरिक मामलों, खेल और अपराध पर ग्राउंड रिपोर्टिंग (धरातलीय पत्रकारिता)…
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