
Sindoor Khela and Golu: नवरात्रि आते ही अमूमन हर तरफ सिर्फ गरबा और डांडिया की बातें होने लगती हैं. लेकिन इस बार समंदर पार न्यूयॉर्क से आए एक बधाई संदेश ने सबका ध्यान खींच लिया. न्यूयॉर्क के मेयर ने अपने नवरात्रि पोस्ट में गरबा के साथ-साथ सिंदूर खेला और गोलू का नाम लेकर हर किसी को चौंका दिया.
भारत से हजारों मील दूर किसी विदेशी मंच पर इन दोनों रस्मों का एक साथ जिक्र आना कोई आम बात नहीं है, क्योंकि ये दोनों परंपराएं देश के दो अलग-अलग कोनों की आत्मा हैं, एक तरफ बंगाल का जज्बात, तो दूसरी तरफ दक्षिण भारत की पुरानी विरासत.
सिंदूर खेला: जब नम आंखों से विदा होती हैं घर आई बेटी दुर्गा
This week, our Hindu neighbors celebrate the Goddess Durga during the festival of Navaratri. Our neighbors will dance Garba, venerate the Goddess Durga with Sindur Khela, receive Tika from elders, set up Golu in their homes, and so much more. Whether your family calls it Durga Puja, Dashain, Dussehra, or Navratri, may this festival mark a season of reflection and renewal.
— Mayor Zohran Kwame Mamdani (@NYCMayor) October 14, 2026
लाल पाड़ की सफेद साड़ी और गालों पर लगा गाढ़ा लाल सिंदूर. विजयादशमी के दिन बंगाल के किसी भी पूजा पंडाल में चले जाइए, यही तस्वीर दिल में उतर जाती है. बंगाली समाज में सिंदूर खेला कोई रस्म भर नहीं, एक गहरा अहसास है. यहां मां दुर्गा को सिर्फ देवी नहीं, बल्कि अपने मायके आई बेटी माना जाता है.
विदाई के वक्त सुहागन महिलाएं पहले मां की मांग भरती हैं, उन्हें मीठा पान और संदेश खिलाती हैं, और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सदा सुहागन रहने की दुआ देती हैं. इस पूरे माहौल में जहां एक तरफ ढोल-ढाक की थाप पर नाच-गाना होता है, वहीं दिल के किसी कोने में बेटी के ससुराल लौटने की टीस और आंखों में आंसू भी तैर रहे होते हैं.
बोम्माई गोलू: वो अनूठी परंपरा, जहां घर की सीढ़ियों पर उतर आती हैं देव कथाएं
वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में नवरात्रि का रंग बिल्कुल अलग दिखता है. यहां त्योहार की पहचान है गोलू या बोम्माई कोलू. घरों में लकड़ी के तख्तों से सीढ़ियां बनाई जाती हैं और उन पर देवी-देवताओं, साधु-संतों, राजा-रानियों और आम जिंदगी से जुड़ी मिट्टी व लकड़ी की खूबसूरत गुड़ियां सजाई जाती हैं. इसे सिर्फ सजावट कहना गलत होगा.
असल में यह अपनी आने वाली पीढ़ी को बिना किताबों के रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियां सिखाने का सदियों पुराना देसी तरीका है. नौ दिनों तक महिलाएं और बच्चे एक-दूसरे के घर गोलू देखने जाते हैं, पारंपरिक सुंदर-कांड और भजन गाते हैं और प्रसाद बांटते हैं.
सात समंदर पार भारत की असली विविधता का मुरीद हुआ न्यूयॉर्क
सिंदूर खेला और गोलू, दोनों का मिजाज और भूगोल एक-दूसरे से एकदम जुदा है. सिंदूर खेला जहां पूर्वी भारत में विजयादशमी के दिन मां की विदाई और नारी के सुहाग का भावुक उत्सव है, वहीं गोलू दक्षिण में पूरे नौ दिन चलने वाला परिवारों और समाज को जोड़ने का एक बेहद शांत व कलात्मक जरिया है.
न्यूयॉर्क के मेयर के संदेश में इन दोनों का नाम साथ आना यह साबित करता है कि दुनिया अब भारत के सिर्फ उन्हीं रंगों को नहीं देख रही जो दूर से चमकते हैं, बल्कि वह हमारे उन स्थानीय रीति-रिवाजों और आस्था की जड़ों को भी पहचानने लगी है, जो सदियों से हमारे घरों में चुपचाप रचे-बसे हैं.
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