

नई दिल्ली:
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद उनसे मिलने होम मिनिस्टर अमित शाह पहुंचे. उनके अलावा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जैसे नेताओं ने भी धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की. माना जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के साथ पार्टी खड़ी है. यह संदेश देने के लिए सरकार के सीनियर मंत्रियों ने उनसे मुलाकात की है. इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी भाजपा की सराहना की. उनका कहना था कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा योगदान दिया है. उनके नेतृत्व में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू किया जा सका.
यही नहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनाथ सिंह, किरेन रिजिजू समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी उनके कार्यकाल को सराहा. इस तरह भाजपा नेतृत्व ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि धर्मेंद्र प्रधान की अहमियत अब भी उसके लिए बरकरार है. धर्मेंद्र प्रधान की भाजपा में जड़ें कितनी गहरी हैं, इससे ऐसे समझा जा सकता है कि वह यूपी, बिहार जैसे राज्यों के चुनाव में प्रभारी थे. इसके अलावा हरियाणा, बंगाल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के चुनाव में भी उनके सांगठनिक कौशल और चुनाव रणनीति का फायदा सरकार उठा चुकी है.
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आंदोलन के दबाव में लिया गया इस्तीफा, पर संगठन में अहम हैं धर्मेंद्र प्रधान
ऐसे में आंदोलन के दबाव में इस्तीफा भले लिया गया है, लेकिन सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अब भी वह एक मजबूत नेता हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभाली थी और तब से ही धर्मेंद्र प्रधान सरकार में एक मजबूत कड़ी के तौर पर हैं. धर्मेंद्र प्रधान एक तरफ आरएसएस के भी करीबी रहे हैं तो वहीं मौजूदा सरकार में भी उनका कद लगातार बढ़ता रहा है. ऐसे में अपने 26 सालों के राजनीतिक करियर में पहली बार उन्हें इस तरह का झटका लगा है. माना जा रहा है कि अब उन्हें भाजपा के संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है. हालांकि इस तरह मंत्री पद जाना उनके राजनीतिक कद के लिहाज से एक झटका ही है. देखना होगा कि आने वाले समय में वह कैसे इससे उबरकर आगे बढ़ते हैं.





