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 देश में पहली बार वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों की एंट्री, मध्य प्रदेश सरकार के फैसले पर चौतरफा विरोध शुरू | MP Waqf Board New Exicutives Non-Muslims inducted into the Waqf Board for the first time in the country; widespread opposition erupts over the Madhya Pradesh government’s decision



MP Waqf Board New Exicutive: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव (Mohan Yadav) सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने देश की सियासत और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. दरअसल, देश में पहली बार किसी राज्य ने नए वक्फ कानून के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए दो हिंदू सदस्यों को भी जगह दे दी है. अब तक वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि ही शामिल होते थे, लेकिन इस नए फैसले ने पुरानी परंपरा को पूरी तरह बदल दिया है.

सरकार का दावा है कि वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने वाला  मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है. इसके साथ ही सरकार और भाजपा दावा कर रही है कि इससे वक्फ के काम में पारदर्शिता आएगी. दरअसल, इस नए कानून के तहत राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य किया गया है, जो कि 1995 के पुराने वक्फ अधिनियम से बिल्कुल अलग है.

नियुक्त किए गए हिंदू सदस्य संघ और भाजपा  के नेता हैं

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में जिन सदस्यों को नियुक्त किया गया है, उनमें मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव के नाम शामिल हैं. मनोज मालपनी बी.कॉम ग्रेजुएट हैं और पिछले लगभग तीन दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े रहे हैं. हालांकि, वे चुनावी राजनीति से दूर रहे हैं. वहीं, अनिमेष भार्गव फाइनेंसियल मैनेजमेंट में MBA हैं और कॉर्पोरेट सेक्टर में 18 साल का अनुभव रखते हैं. एक दशक पहले निजी नौकरी छोड़कर वे भाजपा संगठन में सक्रिय हुए और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट हैं.

कांग्रेस पार्टी ने जताई तीखी आपत्ति

भाजपा सरकार जिस फैसले को पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के रूप में पेश कर रही है, उस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है. आरिफ मसूद ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन (Subjudice) है, तो सरकार को इतनी जल्दबाजी करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला शीर्ष अदालत से ही आना है. मसूद ने बोर्ड के गठन की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए और कहा कि नियमों के विपरीत दो की जगह तीन गैर मुस्लिम चेहरे दिख रहे हैं. उन्होंने सरकार के ‘सद्भावना’ वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में ऐसी राजनीतिक सद्भावना की कोई आवश्यकता नहीं है.

‘क्या मुस्लिम को महाकाल मंदिर समिति का सदस्य बनाया जा सकता है’? 

इस फैसले के बाद धार्मिक मंचों पर भी तीखी बहस शुरू हो गई है. मुस्लिम विद्वान इमरान खोखर ने इस नियुक्ति के तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जो लोग इस्लाम और वक्फ व्यवस्था की बारीकियों से वाकिफ नहीं हैं, वे वक्फ बोर्ड में क्या भूमिका निभाएंगे? उन्होंने सवाल किया कि क्या कभी किसी मुस्लिम को महाकाल मंदिर समिति या राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बनाया जा सकता है? 

हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद ने दी बेतुकी दलील

दूसरी ओर, हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने सरकार के इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है. उनका कहना है कि इस फैसले से केवल उन्हीं लोगों को परेशानी हो रही है, जिन्होंने करोड़ों रुपये की वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं. उन्होंने कहा कि नए बोर्ड के आने से वक्फ जमीनों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी. जब उनसे पूछा गया कि क्या सनातन बोर्ड बनने पर मुस्लिमों को शामिल किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि जो भी मुस्लिम सनातन धर्म को अपनाएगा, उसे निश्चित रूप से शामिल किया जाएगा.

भाजपा ने बताया गरीबों के कल्याण का मामला 

पुनर्गठित बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस से सकारात्मक सहयोग की अपील की है. वहीं, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि वक्फ की संपत्तियां किसी एक मौलवी की जागीर नहीं हैं, बल्कि वे देश की जमीन हैं और उनका उपयोग गरीबों के कल्याण के लिए होना चाहिए. शर्मा ने गंगा जमुनी तहजीब का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू सदस्यों की उपस्थिति से किसी भी आम मुस्लिम को कोई परेशानी नहीं होगी. यह कदम केवल वक्फ संपत्तियों में होने वाली हेराफेरी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उठाया गया है. नवनियुक्त सदस्य अनिमेष भार्गव ने भी कहा कि इस पूरी कवायद को सांप्रदायिक चश्मे से देखने के बजाय सुशासन और पारदर्शिता के लेंस से देखा जाना चाहिए.

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शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघोगढ़ से अनिमेष भार्गव को मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है. वहीं, सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है. 10 सदस्यीय इस बोर्ड में पूर्व केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला, आरिफ अकील, फैजान खान, फातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान भी शामिल हैं.

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