खबर

 डिजिटल सिस्टम में सेंध और ₹1.7 करोड़ का खेल, उत्तराखंड STF ने दबोचा फर्जी आर्म्स लाइसेंस रैकेट का मास्टरमाइंड | Uttarakhand STF Busts Rs 1.7 Crore Fake Arms Licence Network; 9 Arrests Including Kingpin, Probe Expands Across States



अवैध हथियारों और जाली दस्तावेजों के खिलाफ उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक बहुत बड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कामयाबी हासिल हुई है. एसटीएफ ने एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय सिंडिकेट (Racket) का पर्दाफाश किया है, जो देश के अलग अलग राज्यों में फर्जी आर्म्स लाइसेंस बनाने और बेचने का काला कारोबार धड़ल्ले से चला रहा था.

पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार (Mastermind) सतानंद शर्मा को उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर से धर दबोचा है. इस हाईप्रोफाइल मामले की परतें जैसे जैसे खुल रही हैं, जांच एजेंसियां भी हैरान हैं.

करीब ₹1.7 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा

NDTV से खास बातचीत करते हुए एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने इस बात की पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी के बैंक खातों को खंगालने पर करीब ₹1.7 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है. यह पूरी रकम सीधे तौर पर देश के अलग अलग हिस्सों में फर्जी हथियार लाइसेंस तैयार करने और उन्हें मोटी रकम में बेचने के जरिए कमाई गई थी.

14 अवैध हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद

इस बड़े रैकेट की शुरुआत इसी महीने की शुरुआत में हुई थी, जब उत्तराखंड के काशीपुर पुलिस स्टेशन में फर्जी आर्म्स लाइसेंस और अवैध हथियार रखने को लेकर एक क्रिमिनल केस दर्ज किया गया था. एसटीएफ ने जब मामले को अपने हाथ में लिया, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं. अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ तीन अलग अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं. एसटीएफ की टीमों ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर के भारी मात्रा में अवैध असलहे और जाली दस्तावेज बरामद किए हैं. 

  •  14 अवैध हथियार: इनमें प्रतिबंधित और अत्याधुनिक राइफलें, पिस्टल, एक रिवाल्वर और पंप एक्शन गन शामिल हैं.
  •  355 जिंदा कारतूस: हथियारों के साथ साथ भारी तादाद में जिंदा कारतूसों का जखीरा भी बरामद हुआ है.
  •  जाली लाइसेंस: कई ऐसे फर्जी हथियार लाइसेंस जब्त किए गए हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं.

ऐसे दिया जाता था धोखाधड़ी को अंजाम

जांचकर्ताओं के मुताबिक, मास्टरमाइंड सतानंद शर्मा बेहद शातिर तरीके से इस पूरे खेल को अंजाम दे रहा था. उसने सरकारी सिस्टम की कमियों का फायदा उठाया. शुरुआती जांच में सामने आया है कि सरकारी अभिलेखागार से जो पुराने और लापता हो चुके यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर्स थे, उन्हें इस नेटवर्क ने अवैध रूप से हासिल कर लिया. इसके बाद, उन्हीं पुराने यूआईएन नंबरों का इस्तेमाल करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए और वैध दिखने वाले आर्म्स लाइसेंस जेनरेट कर दिए जाते थे. पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस डिजिटल सेंधमारी में विभाग के किन किन अंदरूनी लोगों या सरकारी मुलाजिमों का हाथ था.

यूपी का ‘गैंगस्टर’ है मास्टरमाइंड सतानंद

एसटीएफ के अधिकारियों का दावा है कि आरोपी के वित्तीय रिकॉर्ड से साफ है कि देश के कई रसूखदार और संदिग्ध लोग इस नेटवर्क के कस्टमर (लाभार्थी) थे, जिन्होंने पैसे देकर ये फर्जी लाइसेंस हासिल किए. पुलिस को शक है कि इस रैकेट से जुड़े सैकड़ों और लोग अभी भी बाहर घूम रहे हैं, जिनकी तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं. आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता. पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि मास्टरमाइंड सतानंद शर्मा का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. वह पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी कई गंभीर मामलों में वांछित रहा है. उसके खिलाफ यूपी के गाजियाबाद और शाहजाहनपुर में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने के कई मुकदमे दर्ज हैं. यही नहीं, वह अतीत में यूपी पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट के तहत भी बुक किया जा चुका है.

यह भी पढ़ें- Lucknow Fire: ’15 मौतें अखिलेश के कुकृत्यों का नतीजा’, अलीगंज अग्निकांड पर डिप्टी सीएम पाठक का तीखा हमला

एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने आगे बताया कि उत्तराखंड के भीतर जितने भी आर्म्स लाइसेंस दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर आए हैं, उनमें से हजारों की गहन वेरिफिकेशन प्रक्रिया अब भी जारी है. एजेंसी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि फर्जी और अवैध हथियार लाइसेंस न सिर्फ आम जनता की सुरक्षा, बल्कि देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर खतरा हैं. एसटीएफ ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी. पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास भी ऐसा कोई संदिग्ध या जाली लाइसेंस होने की जानकारी है, तो वे खुद सामने आकर कानून की मदद करें.




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button