
नई दिल्ली:
‘द एम्पायर’, ‘ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड’ और ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ जैसी वेब सीरीज आज इतिहास को भव्य अंदाज में पर्दे पर उतार रही हैं. लेकिन OTT के दौर से कई दशक पहले दूरदर्शन पर एक ऐसा धारावाहिक आया था, जिसने भारत के हजारों सालों के इतिहास को करोड़ों घरों तक पहुंचा दिया. खास बात यह थी कि इसमें नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी से लेकर इरफान खान जैसे कलाकार नजर आए और इसकी कहानी जवाहरलाल नेहरू की मशहूर किताब पर आधारित थी. खास बात ये है कि पंडित नेहरू ने हिन्दुस्तान के इतिहास पर आधारित ये किताब जेल में रहते हुए लिखी थी. यह पुस्तक भारत के इतिहास और सभ्यता पर लिखी गई सबसे फेमस किताबों में गिनी जाती है और इस पर बने सीरियल का नाम था ‘भारत एक खोज’. इसके डायरेक्टर श्याम बेनेगल थे. 1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक के कुल 53 एपिसोड थे. इसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर भारत की आजादी तक की ऐतिहासिक यात्रा को नाटकीय अंदाज में दिखाया गया.
एक ही शो में नजर आए कई दिग्गज कलाकार
इस धारावाहिक की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट थी. इसमें नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, रोशन सेठ, टॉम ऑल्टर, कुलभूषण खरबंदा, पंकज बेरी, रजित कपूर, इला अरुण, अंजन श्रीवास्तव, के.के. रैना और सदाशिव अमरापुरकर जैसे दिग्गज कलाकारों ने अलग अलग ऐतिहासिक किरदार निभाए. यही नहीं, उस समय अपने एक्टिंग सफर की शुरुआत कर रहे इरफान खान भी इस धारावाहिक का हिस्सा थे. बाद में उन्होंने भारतीय सिनेमा ही नहीं, हॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाई.
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सिंधु घाटी सभ्यता से आजादी की लड़ाई तक

‘भारत एक खोज’ की कहानी किसी एक पात्र के इर्द गिर्द नहीं घूमती थी. हर एपिसोड में इतिहास का नया अध्याय खुलता था. कभी मौर्य साम्राज्य, कभी मुगल काल, कभी भक्ति आंदोलन तो कभी स्वतंत्रता संग्राम. यही वजह थी कि यह धारावाहिक दर्शकों के लिए इतिहास की किताब से कहीं ज्यादा रोचक बन गया. धारावाहिक में रोशन सेठ ने जवाहरलाल नेहरू की भूमिका निभाई थी और वही पूरे शो के सूत्रधार भी थे. वहीं नसीरुद्दीन शाह छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आए. ओम पुरी ने भी अपनी अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए रावण, दुर्योधन, औरंगजेब समेत कई अलग अलग ऐतिहासिक और पौराणिक किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया.
भारतीय टेलीविजन का एक यादगार अध्याय
दशकों बाद भी ‘भारत एक खोज’ को भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार धारावाहिकों में गिना जाता है. इतिहास, साहित्य और अभिनय का ऐसा संगम बहुत कम देखने को मिला, जिसने मनोरंजन के साथ साथ दर्शकों को भारत की ऐतिहासिक विरासत से भी परिचित कराया.
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