
रणबीर कपूर की ‘रामायण’ अपने ऐलान के साथ ही चर्चा में रही है. हाल ही में जब इसका ट्रेलर लॉन्च हुआ तो सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. किसी को फिल्म के वीएफएक्स पसंद नहीं आए, किसी को राम बने रणबीर कपूर, कोई सीता बनी पल्लवी से नाखुश था तो किसी ने लारा दत्ता के लुक और साड़ी पर सवाल उठाए. लेकिन इन सारी बहसों के बीच एक सवाल यह भी है कि क्या पौराणिक फिल्मों को लेकर विवाद अब शुरू हुए हैं या पहले भी होते रहे हैं? या फिर जब कोई बड़ा कलाकार किसी पौराणिक किरदार को निभाता है, तभी ऐसी बहसें तेज हो जाती हैं?
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सवाल यह भी है कि इससे पहले जिन कलाकारों ने भगवान राम का किरदार निभाया, क्या वे अपने व्यक्तित्व, नैन-नक्श, कद-काठी और आवाज के हिसाब से इस भूमिका के लिए बिल्कुल उपयुक्त थे? अगर बात ‘रामायण’ की हो, तो आइए जानते हैं हिंदी सिनेमा के इतिहास में किन-किन कलाकारों ने रामायण पर आधारित फिल्मों में भगवान राम की भूमिका निभाई है.
यूं तो मूक सिनेमा के दौर से ही धार्मिक फिल्में बनती रही हैं और कई कलाकारों ने पौराणिक किरदार निभाए, लेकिन यहां बात बोलती फिल्मों के दौर की, जहां कई कलाकार भगवान राम के रूप में नजर आए.
प्रेम अदीब
एक संभ्रांत परिवार से आने वाले प्रेम अदीब को 40 के दशक का सुपरस्टार कहा जाता है. उन्होंने भगवान राम का किरदार निभाकर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई. प्रेम अदीब पहली बार 1942 में रिलीज हुई ‘भरत मिलाप’ में राम बने. इसके बाद उन्होंने ‘राम राज्य’, ‘रामबाण’, ‘राम विवाह’, ‘लव-कुश’, ‘रामायण’ और ‘हनुमान युद्ध’ समेत करीब नौ फिल्मों में भगवान राम की भूमिका निभाई. इन फिल्मों में ज्यादातर उनकी जोड़ी अभिनेत्री शोभना सामर्थ के साथ बनी, जो नूतन और तनुजा की मां थीं. राम और सीता के रूप में दोनों की लोकप्रियता इतनी थी कि मंदिरों में लगने वाले कैलेंडरों पर भी उनकी तस्वीरें छपती थीं.

साहू मोदक
साहू मोदक ने मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं की फिल्मों में काम किया और अपने करियर में कई पौराणिक फिल्मों का हिस्सा रहे. उन्होंने 1950 में रिलीज हुई ‘श्री राम अवतार’ में भगवान राम की भूमिका निभाई. इसके अलावा वे ‘राम लक्ष्मण’, ‘राम लीला’ और ‘जय हनुमान’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए.

त्रिलोक कपूर
1948 में रिलीज हुई ‘राम भक्त हनुमान’ में त्रिलोक कपूर ने भगवान राम का किरदार निभाया.

अभी भट्टाचार्य
1969 में ‘राम भक्त हनुमान’ नाम से ही एक और फिल्म रिलीज हुई, जिसमें भगवान राम की भूमिका अभी भट्टाचार्य ने निभाई. उन्होंने इसके अलावा भी कई पौराणिक फिल्मों में अभिनय किया.

महिपाल
1961 में रिलीज हुई ‘सम्पूर्ण रामायण’ अपने समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म थी. इसमें भगवान राम की भूमिका महिपाल ने निभाई. महिपाल ने अपने करियर में कई पौराणिक फिल्में कीं और करीब तीन फिल्मों में राम बने. इनमें ‘श्री भरत मिलाप’ और ‘श्री गणेश’ जैसी फिल्में भी शामिल हैं.

विश्वजीत
बंगाल से आए विश्वजीत ने हिंदी सिनेमा को ‘बीस साल बाद’ जैसी सुपरहिट फिल्म दी. 1976 में रिलीज हुई ‘बजरंगबली’ में उन्होंने भगवान राम की भूमिका निभाई.

आशीष कुमार
आशीष कुमार को पौराणिक फिल्मों का सुपरस्टार कहा जाता था. उन्होंने 1975 की सुपरहिट फिल्म ‘जय संतोषी मां’ में मुख्य भूमिका निभाई थी. इससे पहले 1974 में रिलीज हुई ‘हनुमान विजय’ में वे भगवान राम के किरदार में नजर आए.

जितेंद्र
हिंदी सिनेमा के ‘जम्पिंग जैक’ जितेंद्र ने भी भगवान राम की भूमिका निभाई. वे 1997 में रिलीज हुई ‘लव कुश’ में राम बने, जबकि सीता के किरदार में जया प्रदा थीं.

प्रभास
हाल के वर्षों में रिलीज हुई ‘आदिपुरुष’ में प्रभास भगवान राम के किरदार में नजर आए. हालांकि इस फिल्म को अपने संवादों, प्रस्तुति और कई रचनात्मक फैसलों को लेकर काफी विरोध का सामना करना पड़ा.

टेलीविजन के राम
अगर टेलीविजन की बात करें तो रामानंद सागर की ‘रामायण’ की छाप आज भी दर्शकों के दिलों पर कायम है. इसके बाद भी कई बार ‘रामायण’ और रामकथा पर आधारित धारावाहिक बने, जिनमें अलग-अलग कलाकारों ने भगवान राम की भूमिका निभाई.
अरुण गोविल
भगवान राम के किरदार में अरुण गोविल की बनाई पहचान आज भी सबसे अलग मानी जाती है. पर्दे पर ही नहीं, वास्तविक जीवन में भी लोगों ने उन्हें भगवान राम की तरह सम्मान दिया. आज भी जब ‘रामायण’ की बात होती है तो उसकी तुलना रामानंद सागर की ‘रामायण’ और भगवान राम के किरदार की तुलना अरुण गोविल से की जाती है.

गुरमीत चौधरी
एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित ‘रामायण’ में गुरमीत चौधरी ने भगवान राम की भूमिका निभाई. उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा और यह धारावाहिक भी सफल रहा.

आशीष शर्मा
धारावाहिक ‘सिया के राम’ में आशीष शर्मा भगवान राम के किरदार में नजर आए. दर्शकों ने उनके अभिनय के साथ-साथ इस धारावाहिक को भी काफी पसंद किया.

इन सभी कलाकारों ने भगवान राम का किरदार निभाया, लेकिन ‘आदिपुरुष’ को छोड़ दें तो शायद ही किसी कलाकार के चयन या प्रस्तुति को लेकर इतना बड़ा विवाद देखने को मिला. अब सवाल यह है कि क्या किसी भी कलाकार की छवि भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था से बड़ी हो सकती है? या फिर पौराणिक किरदार निभाने वाले कलाकारों के लिए दर्शकों की अपेक्षाएं हमेशा सामान्य फिल्मों से कहीं अधिक रहती हैं?





