
Janmashtami 2026, Kanpur Iskcon Temple: कानपुर के मैनावती मार्ग स्थित ISKCON मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां इस बार बेहद खास हैं. मंदिर में हर साल भक्तों का तांता लगता है, लेकिन इस बार का आकर्षण कुछ अलग ही होने वाला है. चर्चा है कि इस साल श्री राधा-माधव के लिए एक विशेष शाही पोशाक तैयार कराई जा रही है, जिसकी कीमत करीब 5 लाख बताई जा रही है.
हर साल की तरह इस बार भी पोशाक की तैयारी किसी सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा और महीनों की लगन के साथ की जा रही है. मंदिर प्रबंधन से जुड़े सेवादारों के मुताबिक, यह परिधान सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भक्तों के प्रेम और आस्था का प्रतीक है.
हाथ की बारीक कारीगरी और महीनों की मेहनत
इस खास पोशाक को तैयार करने के लिए वृंदावन और बंगाल के अनुभवी कारीगर पिछले कई हफ्तों से दिन-रात जुटे हैं.
प्योर सिल्क और वेलवेट का इस्तेमाल: पोशाक का बेस तैयार करने के लिए शुद्ध कच्चा रेशम और खास मखमली कपड़े का चुनाव किया गया है, ताकि विग्रह पर इसकी चमक स्वाभाविक और सौम्य दिखे.
जरदोजी और धागों का जादू: कारीगरों ने पारंपरिक जरदोजी और जरी का बारीक काम किया है. इसमें मोरपंख, कमल के फूल और पारंपरिक बेल-बूटों की नक्काशी उभारी गई है.
नग और मोतियों की चमक: पोशाक की किनारी और मुख्य हिस्सों में बारीक मोतियों के साथ चमकदार स्टोन टांके गए हैं, जो आरती की रोशनी में बेहद अलौकिक दिखेंगे.
मैचिंग आभूषण और पगड़ी: राधा रानी के लहंगे और ठाकुर जी की धोती-कुर्ते के साथ उनके मुकुट, पटका और बांसुरी की सजावट भी इसी रंग और डिजाइन में तैयार की गई है.
मंदिर में क्या-क्या होगा खास?
जन्माष्टमी की रात जब भगवान यह दिव्य पोशाक पहनकर भक्तों के सामने आएंगे, तो नजारा देखने लायक होगा. इसके अलावा भी मंदिर में कई बड़े आयोजन रखे गए हैं:
- विदेशी फूलों से महकेगा गर्भगृह: ठाकुर जी के विग्रह के आसपास विशेष फूल बंगला सजाया जाएगा. इसके लिए बेंगलुरु और कोलकाता से ताजे रजनीगंधा, गुलाब और आर्किड मंगाए जा रहे हैं.
- पंचामृत से महाभिषेक: रात 12 बजे कान्हा के प्राकट्य के समय दूध, दही, शहद, घी और फलों के रस से महाभिषेक संपन्न होगा.
- 56 भोग का नैवेद्य: अभिषेक के तुरंत बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा.
श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम
जन्माष्टमी पर लाखों लोगों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में कतारबद्ध दर्शन के लिए वाटरप्रूफ शेड और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है. बुजुर्गों के लिए विशेष लाइन और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भी तैयार रहेगा.
सुबह मंगला आरती से शुरू होकर दर्शन का यह सिलसिला देर रात महाआरती तक लगातार चलेगा. अगर आप भी कान्हा के इस नए और मनमोहक रूप को देखना चाहते हैं, तो कानपुर इस्कॉन की यह छटा इस बार अपनी आंखों से देखने का मौका न चूकें.
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