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जंतर-मंतर से लेकर रांची के JPSC प्रोटेस्ट तक, कौन हैं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा? जिन पर फेंकी गई स्याही | Who is Neha bora AISA National president ink attack Ranchi JPSC protest



दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने के बाद देशभर में मशहूर हुईं AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा पर रांची में स्याही फेंकी गई है. नेहा बोरा छात्र प्रदर्शन को समर्थन देने रांची पहुंची थीं, जिसके बाद उन पर स्याही फेंकी गई. दिल्ली के प्रदर्शन के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA ने रांची में JPSC प्रोटेस्ट को अपना समर्थन दिया है. हालांकि उनके इस समर्थन को लेकर कुछ अभ्यर्थी खुश नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि नेहा बोरा कौन हैं और कैसे वो AISA से जुड़ीं और आज बड़े प्रदर्शनों का चेहरा बन चुकी हैं. 

नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल

नेहा बोरा AISA की तरफ से तमाम बड़े प्रदर्शनों का हिस्सा बनती रही हैं और कुछ दिन पहले उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी बड़ी भूमिका निभाई थी. सोनम वांगचुक के साथ ही नेहा बोरा और उनके कुछ साथी भी प्रोटेस्ट के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे थे. करीब 20 दिन तक इन सभी ने बिना खाए प्रोटेस्ट किया था और इसके बाद से ही नेहा बोरा का नाम सोशल मीडिया पर खूब चलने लगा. पुलिस लाठीचार्ज के बाद उनका भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ.

कौन हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा की उम्र अभी महज 29 साल है और वो अपनी बेबाक आवाज के लिए जानी जाती हैं. मूल रूप से नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा से आती हैं, लेकन उनका बचपन का ससमय पश्चिम बंगाल में बीता. उनके पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं. स्कूली पढ़ाई के बाद से ही नेहा बोरा ने एक्टिविज्म शुरू कर दिया और थिएटर में भी खूब दिलचस्पी दिखाई. नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के अरबिंदो कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से एमए किया. फिलहाल नेहा दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में PhD रिसर्च स्कॉलर हैं. 

नेहा बोरा कॉलेज की शुरुआत में ही लेफ्ट छात्र संगठन AISA से जुड़ गईं थीं और उनकी लीडरशिप क्वालिटी को देखते हुए उन्हें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुना गया. अध्यक्ष बनने के बाद से ही वो अपने संगठन की तरफ से हर मोर्चे पर खड़ी रहती हैं और छात्रों की आवाज उठाने का काम करती हैं. 

स्याही कांड के बाद क्या बोलीं नेहा बोरा?

नेहा बोरा ने स्याही फेंके जाने के बाद कहा कि इस तरह की हरकतें वही करते हैं, जिनके पास बोलने के लिए तर्क नहीं है. जिनके पास छात्रों के साथ खड़े रहने की हिम्मत नहीं है. JPSC की परीक्षा को रद्द करने को लेकर जो आंदोलन चल रहा है, कुछ लोग उसे डिस्टर्ब करना चाहते हैं. 

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