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अरावली के भविष्य पर अलवर में मंथन, कमेटी ने ग्रामीणों और पर्यावरणविदों की सुनी राय | Supreme Court SC committee on Aravalli conservation arrived in Alwar for public consultation


अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, सीमांकन और भविष्य को लेकर शुक्रवार को अलवर में अहम जन परामर्श आयोजित हुआ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित 9 सदस्यीय हाई पावर कमेटी ने पहली बार सीधे आमजन, पर्यावरणविदों, खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों और प्रभावित ग्रामीणों से सुझाव लिए. इस बैठक में दिए गए सुझाव समिति की उस रिपोर्ट का हिस्सा बन सकते हैं, जिसे 31 अगस्त 2026 तक सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना है. अलवर के सर्किट हाउस में हाई पावर कमेटी ने लोगों की बातें सुनी, इस दौरान लोग आपस में उलस्ते हुए भी दिखाई दिए.

ग्रामीणों ने कमेटी के सामने रखी बात

कमेटी अरावली की परिभाषा, वैज्ञानिक सीमांकन, पारिस्थितिकी, जैव विविधता और सतत खनन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन कर रही है. यहां समिति विभिन्न हितधारकों से लिखित और मौखिक सुझाव व अभ्यावेदन स्वीकार किए. प्रशासन ने अलवर तहसील के मंगलवास, तेहडपुर और उलाहेड़ी, राजगढ़ तहसील के बहाली और भांकरी, टहला तहसील के मल्लाना, गोरधनपुरा, कालवाड़, खोह-पालपुर, थाना दुन्दपुरी क्षेत्र और खैरथल-तिजारा के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी बात रखने की अपील की थी.

इस बैठक में पर्यावरणविद, संरक्षण विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), खनन पट्टाधारक, परियोजना प्रवर्तक, किसान, खनन श्रमिक, स्थानीय समुदाय, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जिला प्रशासन तथा शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में पहुंचे. इस दौरान लोगों ने अरावली के महत्व अरावली से क्षेत्र को होने वाले फायदे अरावली से जुड़ी हुई छोटी से छोटी जानकारी हाई पावर कमेटी के सामने रखी.

उन्होंने कहा कि अरावली केवल एक पर्वत माला नहीं, पूरे राजस्थान दिल्ली और आसपास के राज्यों के लिए एक जीवन दायिनी है. अरावली के संरक्षण से लोगों को जीवन मिल रहा है.
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10 अगस्त का अरावली क्षेत्र का कमेटी कर रही दौरा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए गठित हाई पावर कमेटी (HPC) 6 से 10 अगस्त तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अरावली क्षेत्र का विस्तृत दौरा कर रही है. समिति 7 अगस्त को फरीदाबाद से अलवर पहुंची. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित यह समिति सुप्रीम कोर्ट को वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट सौंपेगी. समिति का उद्देश्य संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना है.

समिति अरावली क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति, भू-वैज्ञानिक संरचना, जल संसाधन, जैव विविधता, खनन गतिविधियों, भूमि उपयोग में बदलाव और स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ रहे प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लेकर उन्हें अंतिम रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए हैं. अरावली की अखंडता और संरक्षण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई पावर कमेटी का गठन किया था. अब समिति का यह दौरा भविष्य में अरावली संरक्षण, खनन नियंत्रण और पर्यावरणीय नीतियों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है.

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