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छत्तीसगढ़: AI की मदद से पुलिस विभाग में सैलरी धोखाधड़ी का पर्दाफाश, 3 कॉन्स्टेबल ने 3 साल तक किया तगड़ा स्कैम | AI helps expose salary fraud done by three constable in Bastar police Chhattisgarh



छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग में लगभग सैलरी में हेराफेरी करने के आरोप में तीन पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है. गड़बड़ी का खुलासा भी तब हुआ, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पुलिस विभाग में ऑडिट किया गया था. इससे पता चला कि वेतन में हेराफेरी का सिलसिला तीन वर्षों तक किया गया था और करीब 2 करोड़ रुपये गबन किए थे.

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान आरक्षक (कॉन्स्टेबल) गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू के रूप में हुई है.

SP ऑफिस में तैनात था मास्टरमाइंड

पुलिस अधिकारी के अनुसार, गिरीश राय जगदलपुर स्थित एसपी कार्यलय में वेतन शाखा में सहायक के तौर पर तैनात था, जबकि बाकी दो कर्मचारी कार्यालय की अलग-अलग शाखा में तैनात थे. बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि कार्यालय में आंतरिक और बाह्य ऑडिट के दौरान वेतन शाखा में गड़बड़ियों का पता चला, जिसके बाद जांच शुरू की गई.

ऐसे खिलवाड़ कर बढ़ा ली सैलरी

शलभ कुमार ने बताया, ‘जांच में पता चला कि गिरीश राय, जो कर्मचारियों का वेतन बनाने की प्रक्रिया में शामिल थे, ने वेतन रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी को प्रक्रिया से पहले संशोधित किया और धोखाधड़ी से अपना और दो अन्य आरक्षकों का वेतन बढ़ा दिया. पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया.’

उन्होंने बताया कि जांच के नतीजों के आधार पर, सोमवार को जगदलपुर पुलिस थाना में तीनों कॉन्स्टेबलों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. इसके बाद मंगलवार को तीन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

सरकारी खातों से निकाली 2 करोड़ की रकम

आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच सरकारी खातों से 1.5 करोड़ से दो करोड़ रुपये के बीच की रकम निकाली. गिरीश 2012 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात था और अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुआ था, यही धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.

लोन देने के बहाने वेतन बढ़ाया

जांच से यह भी पता चला है कि गिरीश ने कुछ अन्य कर्मचारियों को लोन देने के बहाने उनका वेतन बढ़ाया और बाद में लोन की वापसी के तौर पर उनसे नकद रकम वापस ले ली. उन्होंने कहा कि पुलिस ने ऐसे लाभार्थियों की पहचान कर ली है और कथित साजिश में उनकी भूमिका का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ कर रही है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है.

क्यों सामने नहीं आई गड़बड़ी

पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह धोखाधड़ी अब तक इसलिए पकड़ में नहीं आ पाई, क्योंकि पुलिस में वेतन पर होने वाला खर्च अक्सर बदलता रहता है और ऐसा नियमित तबादला, पोस्टिंग और कर्मचारियों की संख्या में बदलाव की वजह से होता है. इसके उलट, परियोजना आधारित कोष का नियमित वित्तीय ऑडिट होता है.

अधिकारी ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर हर महीने अपने और कुछ अन्य लोगों के नाम पर वेतन बढ़ाकर थोड़ी-थोड़ी रकम निकालते थे और कई महीनों तक ये गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आईं. उन्होंने कहा कि आखिरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स की मदद से किए गए ऑडिट में वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी का पता चला, जिसके बाद जांचकर्ताओं ने वेतन खातों की बारीकी से जांच की.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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