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क्या धर्मांतरण के जाल में फंस रहा है छत्तीसगढ़ का साहू समाज, नंदकुमार साय के खुलासे से मचा हड़कंप | Chhattisgarh Sahu community falling into a conversion trap? Nandkumar Sai revelations spark a stir



Conversion in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘अवैध धर्मांतरण’ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. इस बार इस बहस के केंद्र में राज्य की राजनीति की धुरी माना जाने वाला साहू समाज आ गया है. दरअसल, बीजेपी के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि राज्य में आदिवासियों के साथ-साथ सबसे बड़ी आबादी वाले साहू समाज में भी बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है.

इस बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि अवैध धर्मांतरण को लेकर सिर्फ साहू समाज ही नहीं, बल्कि सारा समाज चिंतित है. इसे रोकने के लिए सरकार कड़े कानून बनाकर पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है. वहीं, साय के बयान के बाद कांग्रेस आक्रामक हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने साय के बयान पर कहा कि नंदकुमार साय के बयान से साफ है कि भाजपा सरकार के दावों के बावजूद राज्य में अवैध धर्मांतरण जारी है. सरकार सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही.

साय के बयान पर डैमेज कंट्रोल में जुटी सरकार

दरअसल, भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है. अवैध धर्मांतरण सिर्फ आदिवासी समाज की चिंता नहीं है, बल्कि राज्य में साहू समाज और अन्य समाजों में भी बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है. हालांकि, इसके बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव सामने आए और उन्होंने कहा कि अवैध धर्मांतरण को लेकर साहू समाज ही नहीं, बल्कि सारे समाज के लोग चिंतित हैं. इसे रोकने की कवायद सरकार द्वारा कड़े कानून बनाकर की जा रही है.

कानूनी तौर पर नहीं हो रहे हैं धर्मांतरित

वहीं, इस धर्मांतरण पर समाजशास्त्री घनाराम साहू का अलग ही मत है. उनका मानना है कि धर्मांतरण के पीछे मुख्य तीन वजहें हैं, जिनमें धार्मिक मान्यता, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं. साहू समाज में बहुत बड़ी संख्या में लोग धर्मांतरित हो रहे हों, ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य लाभ के चक्कर में लोग ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाओं में हिस्सा ले रहे हैं. हालांकि, कानूनी तौर पर ये लोग धर्मांतरित नहीं हो रहे हैं.

राजनीति में बहुत पावरफुल है साहू समाज

ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि जब सारा समाज अवैध धर्मांतरण के जाल में फंस रहा है, तो चर्चा के केंद्र बिंदु में साहू समाज ही क्यों है? दरअसल, छत्तीसगढ़ में साहू समाज की आबादी 30 लाख से ज्यादा है और प्रदेश की राजनीति में साहू समाज सियासी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है. अब तक छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी जनसंख्या वाली जाति तेली या यूं कहें कि साहू समाज माना जाता है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने 19 विधानसभा क्षेत्रों में साहू समाज के 21 व्यक्तियों को प्रत्याशी बनाया था. वर्तमान में 90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में 12 विधायक साहू समाज से हैं. वहीं, छह साहू विधायकों वाली सत्ताधारी बीजेपी में साहू समाज से अरुण साव उपमुख्यमंत्री हैं. इसके अलावा, लोकसभा चुनाव 2024 में छत्तीसगढ़ से सत्ताधारी दल भाजपा के टिकट पर साहू समाज के प्रत्याशी तोखन लाल साहू जीतने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री हैं.

जांच में जुटा साहू समाज

वहीं इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ साहू समाज के अध्यक्ष टहल सिंह साहू (या वीरेंद्र साहू – नोट: मूल पाठ में नीरेन्द्र लिखा है और वाक्य अधूरा था) ने कहा है कि धर्मांतरण के विषय में जो जानकारियां मिल रही हैं, हम पूरे प्रदेश में उसका सर्वे कर रहे हैं कि ग्रामवार कितने परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है. दूसरा, हमारे समाज का कार्यक्रम जो धर्म परिवर्तन और विकृतियों को रोकने के लिए है, उसके तहत संस्कार-विचार को लेकर कार्यशाला के आयोजन की तैयारी चल रही है. शीघ्र ही प्रदेश स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, उसके बाद यह जिलों, परिक्षेत्रों और तहसीलों में होगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि समाज में जो भी विकृतियां हैं, उनको दूर करने के प्रयास किए जाएंगे. इसके साथ ही भ्रमित होकर धर्म परिवर्तन कर रहे लोगों को रोकने के प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि अभी हमने सर्वे कराया है और कारणों का भी पता करने का प्रयास किया जा रहा है. रिपोर्ट आएगी, तो उसकी जानकारी दी जाएगी.

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छत्तीसगढ़ में आम धारणा रही है कि आदिवासियों का धर्म परिवर्तन हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार नेताओं के हालिया बयान ने इस धारणा को तोड़ा है और साहू समाज की चिंता बढ़ा दी है.

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