
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को पहली बार ऐहसास कराया कि जिंदगी और मौत का फासला बहुत कम है. दावा किया जाता है कि ये कोरोना वायरस चीन के वुहान लैब से निकला था. अब खुलासा हुआ है कि अमेरिका के एक बड़े वैज्ञानिक ने इस वुहान लैब की फंडिंग की थी. बृहस्पतिवार को अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) की निवर्तमान डायरेक्टर तुलसी गैबार्ड ने दावा किया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान में एक रिसर्च लैब को फंड दिया था. यही नहीं उन्होंने अमेरिकी एजेंसियों और यहां तक की अमेरिकी संसद को भी जानबूझकर गलत जानकारी दी.
तुलसी गैबार्ड ने आखिरी दिन खोले राज
तुलसी गैबार्ड ने पिछले महीने अपने बीमार पति की देखभाल के लिए डोनाल्ड ट्रंप के इंटेलिजेंस चीफ का पद छोड़ दिया था. अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तुलसी गैबार्ड ने ये धमाका किया है. दस्तावेज जारी करते हुए उन्होंने बताया कि फॉसी ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) में “चमगादड़ कोरोना वायरस पर खतरनाक गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च” के लिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर दिए थे. फॉसी ने 2020 की शुरुआत में अमेरिका में कोविड के आने पर बाइडन सरकार की रणनीति का नेतृत्व किया था. गैबार्ड के दफ्तर ने एक बयान में कहा कि फॉसी ने “वायरस के लैब से लीक होने की सच्चाई को दबाने के लिए राजनीति की.”
Today, on my final day as Director of National Intelligence, I’m releasing never-before-seen communications and documents exposing how Dr. Fauci provided millions in US taxpayer dollars to fund dangerous gain-of-function research at the Wuhan lab, worked with politicized elements… pic.twitter.com/ZMdliW4zyS
— DNI Tulsi Gabbard (@DNIGabbard) June 19, 2026
फॉसी ने खतरनाक रिसर्च को छुपाए रखा
तुलसी के ऑफिस ने यह भी कहा कि 85 साल के फॉसी ने दिसंबर 2022 में पद छोड़ने तक 38 सालों तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीजेज (NIAID) के प्रमुख के तौर पर काम किया. उन्होंने बड़ी फार्मा कंपनियों से जुड़ी “रिस्की कोरोनावायरस रिसर्च” और खरबों डॉलर की “यूनिवर्सल वैक्सीन” बनाने की कोशिशों के लिए फंडिंग की. बयान में कहा गया, “फॉसी पर्दे के पीछे से सलाह देने वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने चुने हुए विशेषज्ञों के साथ मिलकर IC (इंटेलिजेंस कम्युनिटी) पर दबाव डाला कि वे वायरस के प्राकृतिक, जानवरों से उत्पन्न होने की बात को मंजूरी दें, ताकि उनकी खतरनाक रिसर्च छिपी रहे. फॉसी देश के महामारी विशेषज्ञ बन गए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से झूठ, गलत जानकारी और सेंसरशिप को बढ़ावा दिया.”

बयान में आगे कहा गया, “महामारी के दौरान, फॉसी और IC के भीतर राजनीति करने वाले नेताओं ने एक ऐसा रिपोर्टिंग सिस्टम बनाया, जो उनके अपने फायदे के लिए था. उन्होंने IC को सलाह देने के लिए NIAID से फंड पाने वाले अपने चुने हुए वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराया. इस जानकारी ने आधिकारिक इंटेलिजेंस आकलन को आकार दिया, जिसका इस्तेमाल बाद में लैब-लीक थ्योरी को गलत साबित करने के लिए वैज्ञानिक सहमति के तौर पर सार्वजनिक रूप से किया गया.”
डीप स्टेट प्लेबुक जैसे तरीके अपनाए
गैबार्ड के दफ्तर ने यह भी कहा कि फॉसी ने एक “फर्जी पेपर” को इंटेलिजेंस कम्युनिटी के विचार के लिए सही जानकारी के तौर पर बढ़ावा दिया, और इसे पब्लिश करवाने में भी मदद की. इसमें कहा गया है कि सीनियर एनालिस्ट्स ने फॉसी की तारीफ एक “पॉलिसीमेकर” के तौर पर नहीं, बल्कि “असली कोरोनावायरस एक्सपर्ट्स” तक पहुंचाने वाले निष्पक्ष गाइड के तौर पर की, जबकि उन एक्सपर्ट्स को नजरअंदाज किया जो फॉसी की बातों से सहमत नहीं हो सकते थे.

तुलसी ने कहा कि सच छिपाने के लिए एंथनी फॉसी ने जो तरीके अपनाए, वे “डीप स्टेट प्लेबुक” से सीधे लिए गए हैं. उन्होंने कहा, “COVID-19 महामारी ने हमारे लाखों साथी अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों के लिए भारी मुश्किलें और दर्द पैदा किया. सालों के झूठ, सेंसरशिप और सच छिपाने की कोशिशों के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं. सच छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीके सीधे ‘डीप स्टेट प्लेबुक’ से आए हैं: डॉ. फॉसी जैसे राजनीति करने वाले और अपना स्वार्थ देखने वाले नेताओं ने अपनी गलतियों और सत्ता के दुरुपयोग को छिपाया, इंटेलिजेंस के साथ छेड़छाड़ की, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी अहम जानकारियों तक पहुंच रोककर सही तरीके से चुने गए अमेरिकी राष्ट्रपति को कमजोर किया.”
खुफिया विश्लेषकों को धमकी भी दी
बयान में आगे कहा गया है कि कई व्हिसलब्लोअर्स की गवाही से पता चलता है कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने कोविड की उत्पत्ति के बारे में फॉसी के निष्कर्षों को चुनौती दी, तो उन्हें “बदले की धमकी दी गई, उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया और अक्सर उनके करियर में भी बाधा आई.” गैबार्ड के कार्यालय ने कहा, “इससे असहमति को दबा दिया गया और एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा मिला, जहां सच्चाई को अनुरूपता के लिए कुर्बान कर दिया गया और विश्वसनीय सबूतों को दबा दिया गया.” इन आरोपों पर फॉसी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
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लेखक के बारे में
विजय शंकर पांडेय
चीफ सब एडिटर
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