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किराएदारों से एंट्री-एग्जिट फीस वसूल रही सोसाइटी, क्‍या हैं RWA के नियम और कहां करें शिकायत?  | Delhi-Noida-NCR-rwa-society-tenant-entry-exit-fees-rules-complaint-process-explained



नोएडा की एक सोसाइटी में हाल ही में शिफ्ट हुए विकास तिवारी का RWA यानी रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्‍यों से ‘पंगा’ हो गया. विकास जैसे ही मिनी ट्रक ‘पिकअप’ में अपना सामान लदवा कर सोसाइटी पहुंचे, गेट पर ही गार्ड ने रोक दिया और कुछ मिनटों के भीतर ही RWA के दो मेंबर वहां पहुंच गए. सदस्‍यों ने विकास से एंट्री फीस के नाम पर 5,000 रुपये की मांग कर दी. उन्‍होंने कहा कि यहां जो भी नए किराएदार आते हैं, उनके लिए ये RWA का वन टाइम चार्ज है और ये देना ही होगा. विकास ने मंगलवार, 21 जुलाई तक की मोहलत मांगी है. 

ऐसा केवल विकास के साथ ही नहीं, बल्कि पूरे दिल्‍ली-NCR में हजारों लोगों के साथ हो रहा है. कुछ सोसाइटीज तो एंट्री फीस की तरह, एग्जिट फीस भी ले रही हैं. सवाल है कि क्‍या रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या सोसाइटी मैनेजमेंट किसी नए किराएदार के आने (Move-in) या जाने (Move-out) पर एंट्रीया एग्जिट फीस वसूल सकता है? क्या RWA का ऐसा करना कानूनी रूप से सही है?  

NDTV ने ये समझने के लिए एक RWA के सदस्‍य और RWA का रजिस्‍ट्रेशन करने वाले सरकारी विंग ‘फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स विभाग’ के डिप्टी रजिस्ट्रार से बात की. 

जनरल बॉडी मीटिंग में तय किया और बना दिया नियम 

दिल्‍ली की मयूर विहार में एक सोसाइटी के सदस्‍य ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि RWA नए किराएदारों से डेवलपमेंट के नाम पर एंट्री फीस लेती है. इसके लिए सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी (MC) अपनी मर्जी से कोई भी नया चार्ज नहीं थोपती. इसका सोसाइटी के बायलॉज (Bye-laws) में होना या जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में सभी सदस्यों के हस्‍ताक्षर से पास होना अनिवार्य होता है. 

उन्‍होंने बताया कि सोसाइटी में एक्‍सट्रा फंड जुटाने के लिए भी ऐसा तय किया जाता है. कई बार ऐसा होता है कि किराएदारों की शिफ्टिंग के दौरान, बाउंड्री वॉल, सोसाइटी में रखे गमले वगैरह, लाइट्स या अन्‍य फेंसिंग आइटम्‍स वगैरह टूट जाते हैं. इसकी भरपाई के लिए भी एक फंड बनाया जाता है. 

किराएदारों से जो भी फीस ली जाती है, उसकी बकायदा रसीद दी जाती है. किराएदार चाहे तो RWA से इस चार्ज का लिखित नियम या रेजोल्यूशन मांग सकते हैं. हालांकि दबी जुबान में उन्‍होंने ये भी माना कि दिल्‍ली-नोएडा की कई सोसाइटीज एंट्री फीस के नाम पर मनमाना चार्ज वसूलती है. 

मनमानी फीस वसूलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं

RWA या सोसाइटी मैनेजमेंट के पास सिर्फ किराएदार होने के नाते आपसे कोई भी मनमाना शुल्क वसूलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. एडवोकेट आनंद मोहन झा बताते हैं कि केवल NCR ही नहीं, देश के कई राज्यों के कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट और उपभोक्‍ता अदालतों के फैसलों के अनुसार, RWA एक सर्विस प्रोवाइडर की तरह काम करती है, न कि प्रॉफिट कमाने वाली किसी संस्था की तरह.

उन्‍होंने कहा, ‘कोई भी RWA अपनी मर्जी से कोई नया चार्ज नहीं थोप सकती. अगर रख-रखाव, लिफ्ट के मेंटेनेंस या टूट-फूट के नाम पर कोई चार्ज लिया भी जा रहा है, तो उसका सोसाइटी के उप-नियमों (Bye-laws) में दर्ज होना जरूरी है. अगर ऐसा कोई लिखित नियम नहीं है, तो RWA द्वारा ली जाने वाली फीस पूरी तरह अवैध है.

ऐसी स्थिति में कहां शिकायत करें किराएदार? 

NDTV ने इस मामले को लेकर ‘उत्तर प्रदेश फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स विभाग’ के डिप्टी रजिस्ट्रार निखलेश राजन से बात की. उन्‍होंने भी ऐसा कोई नियम-कानून होने की बात से इनकार किया. उन्‍होंने कहा कि एंट्री फीस के नाम पर मनमानी वसूली को किराएदारों का शोषण कहा जा सकता है. 

हमने जब ये पूछा कि जब RWA का पंजीकरण उनका विभाग ही करता है और ऐसे मामलों में शिकायत के लिए किराएदार कहां जाएं तो उन्‍होंने बताया कि फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स विभाग को इसकी शिकायत की जा सकती है. किराएदार, विभाग के पास लिखित में आवेदन दे सकते हैं. 

मनमानी वसूली पर क्‍या कार्रवाई होगी? 

डिप्टी रजिस्ट्रार निखलेश राजन ने बताया कि लिखित शिकायत पर विभाग संज्ञान लेगा. 

  • संबंधित RWA से इस बारे में स्‍पष्‍टीकरण मांगा जा सकता है. 
  • विभाग चाहे तो मामले की जांच कर सकता है. 
  • जांच में गड़बड़ी मिलने पर RWA का ऑडिट भी कराया जा सकता है. 

ऐसे मामलों में अधिकतम कार्रवाई सोसाइटी का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल होने तक की भी कार्रवाइ हो सकती है. अधिकारी RWA का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल करने की अनुशंसा कर सकते हैं. 

निखलेश रंजन ने बताया कि ऐसा करना अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस के दायरे में आता है. बता दें कि कंज्‍यूमर फोरम और उपभोक्‍ता अदालतों ने भी कुछ मामलों में इसे Unfair Trade Practice माना है. कानूनन सोसाइटीज केवल उतना ही मेंटेनेंस या चार्ज वसूल सकती है जो वास्तविक खर्चों से जुड़ा हो.

इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू ये भी है कि किराएदार को RWA का मेंबर बनने के लिए फोर्स नहीं किया जा सकता. वैध रेंट एग्रीमेंट वाले किराएदार को आने-जाने से रोकना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 (Wrongful Restraint-रास्ता रोकना) के तहत एक दंडनीय अपराध है और इसकी पुलिस में भी शिकायत की जा सकती है. 

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