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‘कभी गम न देना, खुशी देने वाले’, बबलू विश्वास का आखिरी REEL; बेसुध पत्नी-बच्चों को देख थम नहीं रहे आंसू | Purnia Fortuner Accident Vinay Kumar Bablu Biswas Last REEL Goes viral Wife Rakhi Pain


पूर्णिया:

‘कभी गम न देना खुशी देने वाले, मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले…’ बबलू विश्वास के फेसबुक पर शेयर इस रील को देखकर आज हर किसी की आंखें भर जा रही है. रील में वो अपनी पत्नी राखी के साथ नजर आ रहे हैं और बैकग्राउंड में वर्ष 1961 में बनी फिल्म ‘प्यार का सागर’ का गाना कभी गम न देना बज रहा है. फेसबुक पर यह उनका आखिरी पोस्ट साबित हुआ. गुरुवार की रात बिहार के पूर्णिया में हुए हादसे ने एक परिवार पर ऐसा दर्द दिया, जिससे उबरना शायद संभव नहीं. मरने वाले बबलू विश्वास शहर के बड़े कारोबारी थे. साथ ही वो बेहद सामाजिक शख्स थे. 

पुल की रेलिंग तोड़ते हुए सौरा नदी में गिरी थी कार

गुरुवार की शाम बबलू विश्वास की फॉर्च्यूनर कार पुल के रेलिंग को तोड़ती हुई पूर्णिया के बीचोबीच से गुजरने वाली सौरा नदी में जा समाई थी. उसमें सवार युवा उद्यमी विनय कुमार उर्फ बबलू विश्वास (46) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फॉर्च्यूनर की रफ्तार काफी तेज थी और ऐसा लगता है कि खुद गाड़ी ड्राइव कर रहे बबलू ने गाड़ी पर अपना नियंत्रण खो दिया.

रेनॉल्ट शोरूम के साथ-साथ वेयरहाउस का भी कारोबार

बबलू विश्वास पूर्णिया में रेनॉल्ट शोरूम के प्रोपराइटर के साथ-साथ वेयरहाउस कारोबार से जुड़े कारोबारी थे. घटना उस समय हुई जब वे अपने कारोबार स्थल से पूर्णिया स्थित आवास पर लौट रहे थे. बबलू विश्वास युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय थे और वे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी काफी सक्रिय थे.

फेसबुक पर उनके 13 हजार से अधिक फॉलोवर बताए जाते हैं. हादसे से पहले उनकी पत्नी और बच्चे उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, जो अधूरी रह गई.

 
चर्चा में है उनकी जिंदगी का आखिरी फेसबुक पोस्ट

बबलू विश्वास का फेसबुक अकाउंट रील से भरा पड़ा है. उनके रील पत्नी-बच्चों, दोस्त और धर्म-आस्था के इर्द-गिर्द घूमता नजर आता है. दुर्घटना से लगभग एक घंटा पहले किया गया उनका फेसबुक पोस्ट उनके फॉलोवर्स और आमजनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

20 सितंबर को उनके फेसबुक पर एक रील लगा है जिसके बैकग्राउंड में वर्ष 1993 की फ़िल्म ‘आदमी खिलौना है’ फ़िल्म का गाना ‘रब जो चाहे वही तो होना है,आदमी खिलौना है–‘ लगा है. यह रील इस घटना की प्रासंगिकता की मजबूत कड़ी नजर आती है.

पूर्णिया के कारोबारी विनय कुमार उर्फ बबलू विश्वास की फाइल फोटो.

पूर्णिया के कारोबारी विनय कुमार उर्फ बबलू विश्वास की फाइल फोटो.
Photo Credit: NDTV

मित्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे युवा उद्यमी

बबलू विश्वास सौम्य और मिलनसार प्रवृति के थे. लिहाजा वे अपने मित्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे. छुट्टियों में परिवार के अलावा दोस्तों के साथ घूमने जाना उनके शौक में शामिल था. वे हर खास लम्हे को अपने फेसबुक कंटेंट का हिस्सा बनाते थे. 2अगस्त के उनके रील के बैकग्राउंड में फ़िल्म दोस्ताना का मशहूर गाना ‘न बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों, हमें दोस्ती की कसम दोस्तों’ गाना बज रहा है और वे एक बस में दोस्तों के साथ सवार हैं.

लिखने वाले ने लिख डाले, मिलन के साथ बिछुड़े…

रीलों की इस फेहरिस्त में 20 अगस्त की एक पोस्ट भी चर्चा में है जिसमें एक झील में उनकी पत्नी राखी अकेले नाव में सवार है और रील के बैकग्राउंड में वर्ष 1983 की फ़िल्म ‘अर्पण’का गाना ‘लिखने वाले ने लिख डाले, मिलन के साथ बिछुड़े—-‘बज रहा है. गाने की ये पंक्तियां सार्वभौम सत्य है जिससे यह दंपत्ति भी अछूता नही रहा.

पत्नी राखी के साथ बबलू विश्वास की पुरानी रील का स्क्रीन शॉट.

पत्नी राखी के साथ बबलू विश्वास की पुरानी रील का स्क्रीन शॉट.
Photo Credit: NDTV

पत्नी और बच्चों का इंतजार रह गया अधूरा

बबलू के भोजन में साग महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था. हादसे से पहले बाजार में उन्होंने साग खरीदा और पत्नी को फोन कर इसकी सूचना दिया और थोड़ी देर में लौटने का वादा किया. पत्नी ने भी ‘करवा चौथ’ का हवाला देकर जल्द लौटने का आग्रह किया. 

इस साल पत्नी ने रखा था करवा चौथ का व्रत

दरअसल,उनकी पत्नी हर साल ‘करवा चौथ ‘ का व्रत रखती थी लेकिन व्यक्तिगत कारणों से इस बार व्रत नही रखी थी. बावजूद पूजा-पाठ की बात कहकर जल्द लौटने का ताकीद की थी. लेकिन, आवास से लगभग 1.5 किमी पहले वे हादसे के शिकार हुए और पत्नी-बच्चों का इंतजार पल भर में ऐसा दर्द दे गया जिसकी टीस उन्हें ताउम्र महसूस होती रहेगी.

बबलू विश्वास के शव के साथ बेसुध पत्नी और बच्चे.

बबलू विश्वास के शव के साथ बेसुध पत्नी और बच्चे.
Photo Credit: NDTV

बेसुध पत्नी और बच्चों का दर्द देख रो पड़े लोग

हादसे के दिन ही बबलू से पत्नी राखी ने दीपावली और छठ मनाने पर चर्चा की थी और छुट्टी के बाद बेटे को स्कूल पहुचाने का प्रोग्राम भी तय हुआ था. शव से लिपटकर बिलखती राखी ईश्वर की नियति पर सवाल उठाते हुए कहती है ‘भगवान, हमने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो यह सजा दी’! 

फिर बदहवास पार्थिव शरीर को झकझोड़ते हुए पूछती है ‘ उठिए, तैयार होइए न, बाबू को स्कूल छोड़ने नही जाना है? फिर अचानक पत्नी राखी खामोश होकर शून्य को निहारने लगती है. आसपास मौजूद हर आंखे नम है. लेकिन सर्वशक्तिमान की मर्जी के सामने विवश. घर के दरवाजे पर निर्गुण गा रहे गायकों की टोली की तेज आवाज खामोशी से उपजी सन्नाटे को चीरती गूंजती है ‘रब जो चाहे वही तो होना है,आदमी खिलौना है’. 

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