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इजरायली जेल से फिलिस्तीनी भाग न जाएं इसलिए ला रहे थे मगरमच्छ, फिर दया आ गई, इंसानों पर नहीं, जानवरों पर! | Israel Making crocodile moat at prison holding Palestinians Jerusalem District Court Stray Order


इजरायली जेल से फिलिस्तीनी भाग न जाएं इसलिए ला रहे थे मगरमच्छ, फिर दया आ गई, इंसानों पर नहीं, जानवरों पर!

इजरायल फिलिस्तीनी कैदियों वाले जेल के बाहर खाई बनाकर मगरमच्छ डालना चाहता है

इजरायल ने अपने जेल में कैद फिलिस्तीनी कैदियों के लिए एक खूंखार प्लान बनाया है. प्लान भी ऐसा कि सुनकर पहली बार को लगे कि मोगैंबो भी शरमा जाए, आपको ऐसा लगे कि हम अभी भी राजा-महाराजा के दौर में जी रहे हैं, मानवाधिकारों की कोई कीमत ही नहीं है. इजरायल ने प्लान बनाया है कि वह उन जेलों के बाहर खाई बनवाएगा जिसमें फिलिस्तीनी कैदी रहते हैं. यह कैदी भागने की कोशिश भी न करें, इसके लिए इन खाइयों में नील नदी से लाए गए खूंखार मगरमच्छों को डाला जाएगा. प्लान बना, काम भी शुरू हो गया लेकिन कोर्ट के एक फैसले ने इसपर पानी फेर दिया. चलिए पूरा मामला बताते हैं.

पहले बदला नियम, फिर काम किया शुरू

सबसे पहले इजरायल के कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने पिछले साल दिसंबर में यह प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा था कि जैसे अमेरिका के फ्लोरिडा के ‘एलिगेटर अल्काट्राज’ इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में किया गया है, वैसे ही फिलिस्तीनी कैदियों वाली जेल को मगरमच्छों से घेरा जाए. नेतन्याहू सरकार भी कहां पीछे रहती. एक महीने पहले इजरायल की पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमैन ने मगरमच्छों को जंगली जानवरों की श्रेणी से हटाकर ‘कैद में पाले गए वन्यजीव’ की श्रेणी में डाल दिया है. इस कदम से इन मगरमच्छों को सुरक्षा उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का रास्ता साफ हो गया.

7 मिलियन डॉलर का प्लान तैयार हुआ और इजरायल ने देश के दक्षिण में स्थित केत्जियोट जेल के चारों ओर एक खाई खोदना शुरू कर दिया है, ताकि उसमें नील मगरमच्छ छोड़े जा सकें. द इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 170 मीटर लंबी खाई बनाई जा रही है.

लेकिन फिर आया कोर्ट का आदेश

यरूशलम जिला कोर्ट ने अगस्त महीने की शुरुआत में मगरमच्छों को केत्जियोट जेल में ट्रांसफर करने पर अस्थायी रोक लगा दी. कोर्ट को फिलिस्तीनी कैदियों की नहीं इन मगरमच्छों की फिक्र थी, आदेश में उसी का जिक्र किया गया. कोर्ट ने यह आदेश ‘लेट द एनिमल्स लिव’ नामक पशु कल्याण समूह द्वारा दायर याचिका के बाद जारी किया, जिसमें मगरमच्छों को फिर से संरक्षित प्रजाति के श्रेणी में डालने का अनुरोध किया गया था. समूह का तर्क था कि पर्यावरण मंत्री ने कानूनी सलाहकारों और प्रकृति एवं पार्क प्राधिकरण की प्रोफेशनल राय की अनदेखी की है, और सरकार के पास इस योजना को आगे बढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है.

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