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अब पहाड़ों पर कब होगी बारिश, कब बर्फबारी- मौसम की मिलेगी सटीक जानकारी | Automatic weather station starts in Kishtwar will help tourists, farmers and locals to get accurate mountain weather updates


Weather Update: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में मौसम की सही और समय पर जानकारी अब पहले से ज्यादा आसानी से मिल सकेगी. किश्तवाड़ जिले के दूरदराज़ माछिल (मचैल) क्षेत्र में एक नया ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन शुरू हो गया है. मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह स्टेशन रियल-टाइम मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध करा रहा है, जिससे मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अध्ययन और समय रहते चेतावनी जारी करने की क्षमता मजबूत होगी. मचैल इलाका अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तेजी से बदलने वाले मौसम के लिए जाना जाता है. ऐसे में यहां लगाया गया यह आधुनिक वेदर स्टेशन स्थानीय लोगों, यात्रियों, तीर्थयात्रियों और प्रशासन के लिए काफी मददगार साबित होगा. अधिकारियों का कहना है कि इससे मौसम में होने वाले अचानक बदलावों पर नजर रखना आसान होगा और जरूरत पड़ने पर समय रहते एडवाइजरी जारी की जा सकेगी.

यह स्टेशन लगातार तापमान, बारिश, हवा में नमी, हवा की गति और मौसम संबंधी अन्य अहम आंकड़ों को रिकॉर्ड करेगा. इससे जम्मू-कश्मीर के मौसम निगरानी नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी. मौसम विभाग का मानना है कि दूर दराज के इलाकों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मौसम से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चरको मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है.

Western Disturbance

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कश्मीर में मानसून से ज्यादा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर

जानकारों के मुताबिक कश्मीर घाटी के मौसम पर मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहता है. यहां मौसम को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली प्रणाली वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भूमध्यसागर के ऊपर पैदा होने वाला एक तूफान है जिसकी वजह से भारत के उत्तर और पश्चिमी इलाकों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान) में सर्दियों और प्री-मानसून के मौसम में बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी लेकर आता है. 

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जब भारत पहुंचता है तो हिमालय इसकी राह में बाधा बनता है. इसके कारण नमी ऊपर उठती है जो ऊपर घने बादल के रूप में तैयार होती है और बाद में यही बारिश या बर्फबारी में बदल जाती है. यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर और हिमालयी इलाकों में अचानक मौसम बदल जाता है.

Photo Credit: NDTV

किसानों, नदियों और पर्यटकों लिए भी बेहद अहम

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से केवल मौसम ही प्रभावित नहीं रहता, बल्कि खेली और जल संसाधनों के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है. सर्दियों में होने वाली बारिश गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है. वहीं पश्चिमी हिमालय में होने वाली बर्फबारी प्राकृतिक जल भंडार का काम करती है, जिससे गर्मियों में गंगा और सिंधु जैसी नदियों में पानी बना रहता है.

हालांकि कई बार अत्यधिक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ओला के गिरने, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक चुनौतियां भी पैदा करता है. ऐसे में मचैल में शुरू हुआ नया ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इस पहल से न केवल स्थानीय प्रशासन को मदद मिलेगी, बल्कि पहाड़ों में यात्रा करने वाले पर्यटकों, धार्मिक स्थल जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मौसम की अधिक भरोसेमंद और सटीक जानकारी मिल सकेगी.

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अभिजीत श्रीवास्तव

Assistant Editor, Digital Content

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