

राजधानी दिल्ली के किलोकरी गांव में मणिपुर के रहने वाले 54 साल के रिटायर्ड म्यूजिक टीचर विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. विक्रम सिंह कई सालों से अपने परिवार के साथ किलोकरी गांव में रह रहे थे. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. कुछ नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है.
NDTV से बातचीत में विक्रम सिंह के बेटे याइफाबा ने आरोप लगाया कि यह घटना नस्लीय भेदभाव (रेसिज्म) का नतीजा है. उन्होंने कहा, ‘अगर हमारा चेहरा ऐसा नहीं होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती. यह सब रेसिज्म की वजह से हुआ है.’
‘पापा कभी लड़ाई नहीं करते थे’
याइफाबा ने बताया कि उनके पिता बेहद शांत स्वभाव के थे. उन्होंने कहा, ‘पापा बहुत शांत रहते थे. वे काफी एनर्जेटिक और खुशमिजाज इंसान थे, लेकिन कभी किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते थे.’
याइफाबा के अनुसार, घटना रात करीब 12 बजे की है. उन्होंने बताया, ‘पापा बाहर गए थे. थोड़ी देर बाद सीढ़ियों पर कुछ हलचल महसूस हुई तो हमें लगा कि कुछ हुआ है. हमने दूसरे कमरे में देखा, लेकिन पापा वहां नहीं थे.’
उन्होंने आगे कहा, ‘फिर मम्मी ने कहा कि पापा कहां हैं, उन्हें फोन करो. तभी सीढ़ियों से आवाज आई, ‘दरवाजा खोलो.’ जब हमने दरवाजा खोला तो देखा कि करीब आठ लोग पापा के साथ मारपीट कर रहे थे. हमने शोर मचाया तो वे लोग वहां से भाग गए.’
अस्पताल में तोड़ा दम
याइफाबा ने बताया कि मारपीट के बाद परिजन विक्रम सिंह को तुरंत अस्पताल लेकर गए. उन्होंने कहा, ‘हॉस्पिटल पहुंचने तक पापा पूरी तरह बेहोश थे. डॉक्टरों ने सीपीआर दिया और उन्हें आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हो गई है.’
‘शोर शांत कराने गए थे’
याइफाबा का कहना है कि नीचे कुछ लोगों के बीच शोर-शराबा हो रहा था और उनके पिता उसे शांत कराने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘नीचे काफी शोर हो रहा था. पापा उसे शांत कराने गए थे, लेकिन वहां उनके साथ मारपीट शुरू हो गई. पूरी घटना सीढ़ियों के पास हुई.’ याइफाबा का आरोप है कि हमलावर स्थानीय लोग हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था.
पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट परिवार
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर याइफाबा ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की है. उन्होंने कहा, ‘पुलिस की कार्रवाई सही है.’ पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.
परिवार की दोस्त ने उठाए बड़े सवाल
विक्रम सिंह की करीबी पारिवारिक मित्र संगीता ने भी इस घटना को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस समाधान ढूंढ़ना होगा.
संगीता ने बताया, ‘विक्रम सिंह अक्सर रात 11 से 11:30 बजे के बीच नीचे जाते थे. उस रात भी नीचे शोर हो रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मारपीट हो रही है. खाना खाने के बाद वह अक्सर कूड़ा फेंकने नीचे जाते थे.’
उन्होंने कहा कि करीब 11:30 से 12 बजे के बीच यह घटना हुई. जब ‘दरवाजा खोलो, दरवाजा खोलो’ की आवाज आई तो परिवार ने दरवाजा खोला. इसके बाद सब लोग चिल्लाने लगे कि कौन है और ऐसा क्यों कर रहे हो. तभी हमलावर वहां से भाग गए.
संगीता का कहना है कि ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं और केवल गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन फिर सब पहले जैसा हो जाएगा. हमें ऐसा समाधान निकालना होगा जिससे नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव न हो.’
स्कूल की साथी ने भी की न्याय की मांग
मृतक विक्रम सिंह के स्कूल में पढ़ चुकीं रंजना ने भी NDTV से बातचीत की. उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह मेरे स्कूल में सीनियर थे. हम मणिपुर के एक ही इलाके से आते हैं. हम न्याय चाहते हैं। सभी आरोपी सीसीटीवी कैमरों में कैद हैं.
रंजना ने आरोप लगाया कि नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ अक्सर भेदभाव होता है. उन्होंने कहा, ‘विक्रम सिंह बेहद सम्मानित व्यक्ति थे. उन्होंने संगीत के क्षेत्र में बहुत काम किया था. इसके बावजूद उनके साथ सिर्फ चेहरे की वजह से भेदभाव और हिंसा हुई.’
जानकारी के मुताबिक, विक्रम सिंह किलोकरी गांव की एक चार मंजिला इमारत की तीसरी मंजिल पर अपने परिवार के साथ रहते थे. फिलहाल दिल्ली पुलिस ने मामले में सभी आरोपियों, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं, को हिरासत में ले लिया है. मामले की जांच जारी है. वहीं, विक्रम सिंह के परिवार और उनके परिचितों ने इस घटना के बहाने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के खिलाफ होने वाले कथित भेदभाव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
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