

कहते हैं जल ही जीवन है. जल का सबसे बड़ा स्रोत नदियां हैं. मगर यही जीवनदायिनी नदियां जब गुस्से में आती हैं तो वह प्रलय ला देती हैं. जीवन को ही पूरी तरह से लील जाती है. यही नेपाल में हुआ है. अब नेपाल में नदी के किनारे अलग-अलग इलाकों से शव आ रहे हैं. इनकी शिनाख्त करने के लिए और लापता लोगों की तलाश में स्निफर डॉग्स को लगाया गया है.
50 किलोमीटर के दायरे में मिले 350 शव
ये स्निफर डॉग्स पूरे इलाके में कई बार गश्त लगाते हैं. इस दौरान ये शवों को ढूंढने की कोशिश करते हैं. कई बार यही बताते हैं कि वहां शव फंसा हो सकता है. सुबह से लेकर शाम तक यह कई बार किया जाता है. दरअसल, त्रिशूली नदी अपना प्रवाह अलग-अलग समय बहाती है. इस दौरान तटों पर आकर कई बार शव छोड़ जाती हैं. एनडीटीवी की टीम चितवन के इलाके में पहुंची तो उसे स्निफर डॉग्स शवों की तलाश करते दिखे. करीब 50 किलोमीटर के दायरे में ही 350 से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं.
त्रिशुली नदी में नाव भी चलाई जा रही
इसी तरह त्रिशूली नदी पर अब शवों को निकालने के लिए नाव भी चलाई जा रही है. नाव पर बैठकर सुरक्षा और बचाव कार्य में लगे लोग नदी में शवों की तलाश कर रहे हैं. यह इसलिए मुश्किल है, क्योंकि किसी को नहीं पता कि नदी कब और कितनी तेज उफान लेकर आएगी. कितनी तेज लहर लेकर आएगी. उस दौरान बेहतरीन से बेहतरीन ट्रेंड फोर्सेज के लिए भी मुश्किल हो जाती है.
यह नदी मकान से लेकर ट्रक, गाड़ी और इंसानों सहित न जाने क्या-क्या बहा ले गई. दिन-रात की इन चुनौतियों के बीच ऐसा लग नहीं रहा है कि अगले कुछ दिनों में भी अपना वेग अपनी प्रवाह या अपनी तासीर बदलने को तैयार है. फिलहाल, नेपाल में राहत और बचाव कार्य युद्ध गति पर चल रहे हैं, मगर यह एक ऐसा युद्ध है, जिसका सामना करने के लिए नेपाल क्या कोई भी देश अब तक तैयार नहीं है.
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