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UP शिक्षा विभाग में बड़ा खेल: 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब, अलमारियां और दो कक्ष सील | up education department scam hardoi bsa ajit singh fir 61 teachers files missing


उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का बेसिक शिक्षा विभाग इन दिनों दो बड़े मामलों को लेकर सुर्खियों में है. एक तरफ 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ी 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां (फाइलें) गायब होने का मामला सामने आया है, तो दूसरी तरफ एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब एजुकेटर भर्ती कराने वाली संस्था की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजीत सिंह के खिलाफ कोतवाली शहर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया. आरोप है कि फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी.

तीन सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरी और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की तीन सदस्यीय समिति आज बीएसए कार्यालय पहुंची. टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की. जांच के दौरान कुछ पत्रावलियां गायब मिलीं, जबकि कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए. इसके बाद भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि कुछ दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका है, जिसकी अलग से जांच कराई जाएगी.

अनुपम मिश्रा के खिलाफ एफआईआर

जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख रिकॉर्ड से गायब हैं. इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ कल ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है. खास बात यह है कि एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी भी अनुपम मिश्रा के पास ही थी. ऐसे में दोनों मामलों के तार एक ही दफ्तर और एक ही व्यवस्था से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं. अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड कैसे गायब हुए और इसके पीछे किसकी भूमिका रही.

उज्ज्वला सेवा संस्थान की शिकायत

उधर, एजुकेटर भर्ती कराने वाली आउटसोर्सिंग संस्था ‘उज्ज्वला सेवा संस्थान’ की शिकायत ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया है. एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी और बाद में दो लाख रुपये लेने का भी दावा किया गया है. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. एक तरफ गायब फाइलों का रहस्य है, तो दूसरी तरफ भर्ती में कथित धांधली और रिश्वतखोरी के आरोप; ऐसे में हरदोई का शिक्षा विभाग अब जांच एजेंसियों के रडार पर है और सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच की आंच आखिर कहां तक पहुंचती है.

पेंशन के प्रकरण लंबित

सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने बताया, “जिलाधिकारी के समक्ष जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कुछ शिकायतें निरंतर प्राप्त हो रही थीं. इनमें कुछ शिकायतें नियुक्ति और चयन प्रक्रिया को लेकर थीं, तो कुछ पत्रावलियों के संबंध में बताया गया कि जो पूर्व में नियुक्तियां की गईं, उनमें धांधली हुई है. इसके अलावा पेंशन के भी बहुत सारे प्रकरण यहां लंबित बताए जा रहे थे. उन सभी समेकित शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी ने एक तीन सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें हमारे डायट प्राचार्य जी, एसडीएम सदर और मैं शामिल हूं. हम तीनों लोग आज यहां कार्यालय आए और विभिन्न पटलों पर जो भी लंबित प्रकरण हैं या जो मामले जांच के अधीन बताए गए हैं, उन सबको यहां देखा गया है.”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ मामलों में हमें कुछ पत्रावलियां गायब मिलीं या उन पत्रावलियों को देखकर ऐसा संदेह हुआ कि उनमें कुछ गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय की अध्यक्षता में एक उप-समिति बना दी गई है, जो अपनी जांच रिपोर्ट अलग से देगी. इसके अलावा दो-तीन अलमारियां और एक कक्ष, जिसमें पूर्व पटल प्रभारी अनुपम बाबू कार्य देखते थे, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है.

अनुपम बाबू द्वारा संभाली जा रही भर्ती पत्रावलियों में कुछ अनियमितताओं की शिकायतें थीं और चूंकि वे आज उपलब्ध नहीं हुए, इसलिए उनके कक्ष व अलमारियों को सील कर उप-समिति को सुपुर्द कर दिया गया है, जो अपनी रिपोर्ट अलग से देगी. इसके साथ ही आज एक और शिकायत आई थी, जो अभी हाल ही में हुई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में अनियमितता से जुड़ी थी. इस मामले में कार्यदायी संस्था ने आज एक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई है. मामला पंजीकृत होने के बाद विवेचना और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. एफआईआर में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा रिश्वत (उत्कोच) मांगने की बात कही गई है. पुलिस जांच पूरी होने के बाद जो भी निर्णय होगा, वह सबके समक्ष आएगा.”

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