

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बेहद खास महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है. वहीं, जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है. प्रदोष व्रत हर महीने में दो बार कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून 2026 की रात 10 बजकर 22 मिनट से शुरू हुई और इसका समापन 28 जून 2026 की रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर शनि प्रदोष व्रत आज, 27 जून 2026, शनिवार को रखा जा रहा है.
शनि प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
- आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 59 बजे तक रहेगा.
- वहीं, 10 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक अमृत काल का योग बनेगा.
- इसके अलावा 12 बजकर 16 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा, जिसे किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है.
आज प्रदोष काल का मुहूर्त
हालांकि, प्रदोष व्रत में सबसे अधिक महत्व प्रदोष काल का होता है. आज प्रदोष काल का समय शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 6 मिनट रहेगा. इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाएगा.
शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि
- व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रत का संकल्प लें.
- दिनभर श्रद्धा के साथ उपवास रखें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें.
- शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.
- इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर रोली, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें.
- भोग में खीर और मौसमी फल चढ़ाएं.
- पूजा के दौरान 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और अंत में शिव आरती करें.
- शनि प्रदोष व्रत के अवसर पर शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से शनि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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