धर्म

Sawan 2026: सावन में महादेव को कौन से फूल सबसे प्रिय और कौन-सा फूल चढ़ाने से बचना चाहिए?


सावन में शिव को बेलपत्र के साथ बेल का फूल भी चढ़ाएं. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी सामंजस्य बढ़ाने और वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं कम करने के लिए ये उपाय कारगर है.

सावन में शिव को बेलपत्र के साथ बेल का फूल भी चढ़ाएं. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी सामंजस्य बढ़ाने और वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं कम करने के लिए ये उपाय कारगर है.

श्रावण मास में शिवलिंग पर अलसी के फूल अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है. मान्यता है इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने, जीवन में सुख-समृद्धि आने और परिवार पर भगवान शिव की कृपा बनी रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

श्रावण मास में शिवलिंग पर अलसी के फूल अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है. मान्यता है इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने, जीवन में सुख-समृद्धि आने और परिवार पर भगवान शिव की कृपा बनी रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

रोग, दोष और मानसिक परेशानी से मुक्ति पाने के लिए सावन में शिव जी की पूजा आक के फूल करना चाहिए.

रोग, दोष और मानसिक परेशानी से मुक्ति पाने के लिए सावन में शिव जी की पूजा आक के फूल करना चाहिए.

जिन लोगों को संतान प्राप्ति की कामना है उन्हें सावन में शिव साधना धूतरे के फूले से करना चाहिए. ये फूल शिवलिंग पर अर्पित कर अपनी मनोकामना कहैं. कहा जाता है कि शिव जी के आशीर्वाद से घर में जल्द बच्चे की किलकारियां गूंजती हैं.

जिन लोगों को संतान प्राप्ति की कामना है उन्हें सावन में शिव साधना धूतरे के फूले से करना चाहिए. ये फूल शिवलिंग पर अर्पित कर अपनी मनोकामना कहैं. कहा जाता है कि शिव जी के आशीर्वाद से घर में जल्द बच्चे की किलकारियां गूंजती हैं.

शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं तो सावन में आप शंखपुष्पी या शमी के फूल से महादेव की आराधना करें. इससे शनि की शुभता प्राप्त होती है.

शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं तो सावन में आप शंखपुष्पी या शमी के फूल से महादेव की आराधना करें. इससे शनि की शुभता प्राप्त होती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को कुछ फूल अर्पित नहीं किए जाते, जैसे केतकी (केवड़ा) का फूल, चंपा का फूल. इन दोनों फूलों का उल्लेख शिव पुराण से जुड़ी कथाओं में मिलता है, जिसके कारण इन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को कुछ फूल अर्पित नहीं किए जाते, जैसे केतकी (केवड़ा) का फूल, चंपा का फूल. इन दोनों फूलों का उल्लेख शिव पुराण से जुड़ी कथाओं में मिलता है, जिसके कारण इन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है.

Published at : 07 Jul 2026 12:56 PM (IST)

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