
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है. पितृ पक्ष में पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजन किया जाता है और उनके प्रति आदर-भाव प्रकट किया जाता है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक, भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, इस बार पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर से हो रहा है और यह 10 अक्तूबर तक चलेगा.
देवी-देवताओं के अलावा पितर भी हमारे जीवन के मंगलकार्यों के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं. हमारे पूर्वज पितृ लोक में वास करते हैं और श्राद्ध पक्ष के दिनों में धरती पर आते हैं. उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान देने की परंपरा है. ऐसा करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और वे परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर जाते हैं.
30 सितंबर को होगा चतुर्थी और पंचमी दोनों का श्राद्ध
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा:
- चतुर्थी तिथि: दोपहर 2:56 बजे तक रहेगी.
- पंचमी तिथि: इसके बाद शुरू होगी, जो अगले दिन दोपहर 12:36 बजे तक रहेगी.
- पंचमी तिथि अगले दिन अपराह्न काल को स्पर्श नहीं कर रही है, इसलिए इसका श्राद्ध भी 30 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा.
पितृ दोष से मुक्ति और श्राद्ध का महत्व
पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होती है और आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि (सर्वपितृ अमावस्या) पर इसका समापन होता है.
पितृ दोष का प्रभाव: यदि पितरों की कृपा न हो, तो कुंडली में पितृ दोष लगता है. इससे घर-परिवार में कलह, आर्थिक तंगी, आकस्मिक दुर्घटनाएं और वैवाहिक जीवन में बाधाएं उत्पन्न होती हैं.
कौवे को भोजन: श्राद्ध वाले दिन कौवे को भोजन कराने का विशेष विधान है. मान्यता है कि पितर कौवे के रूप में पृथ्वी पर आते हैं और उनके माध्यम से भोजन पितरों तक पहुंचता है.
सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्तूबर): इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती.
दोपहर में करें तर्पण, इन बातों का रखें ध्यान
- श्राद्ध का सही समय: देवी-देवताओं की पूजा सुबह और शाम की जाती है, लेकिन पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म दोपहर करीब 12:00 बजे (अपराह्न काल) करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है.
- मांगलिक कार्य वर्जित: पितृ पक्ष की अवधि में गृह प्रवेश, मुंडन, कर्णवेध, विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इन दिनों नए वस्त्र खरीदना और पहनना भी वर्जित माना गया है.
श्राद्ध 2026: संपूर्ण तिथियों की सूची
| दिनांक | श्राद्ध तिथि |
| 26 सितंबर | पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | तृतीया श्राद्ध |
| 30 सितंबर | चतुर्थी श्राद्ध एवं पंचमी श्राद्ध |
| 01 अक्तूबर | षष्ठी श्राद्ध |
| 02 अक्तूबर | सप्तमी श्राद्ध |
| 03 अक्तूबर | अष्टमी श्राद्ध |
| 04 अक्तूबर | नवमी श्राद्ध |
| 05 अक्तूबर | दशमी श्राद्ध |
| 06 अक्तूबर | एकादशी श्राद्ध |
| 07 अक्तूबर | द्वादशी श्राद्ध |
| 08 अक्तूबर | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 09 अक्तूबर | चतुर्दशी श्राद्ध |
| 10 अक्तूबर | सर्व पितृ अमावस्या |
| 11 अक्तूबर | मातामह (नाना) श्राद्ध |
Weekly Love Horoscope: प्यार में बढ़ेगी नजदीकी या होगी तकरार? पढ़ें 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 का लव राशिफल और उपाय
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.